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क्या इंदौर में बेकाबू हो रही है आवारा कुत्तों की समस्या? बढ़ती संख्या से लोगों की बढ़ी चिंता

By: संवाददाता । विराट वसुंधरा

On: Wednesday, February 4, 2026 6:40 AM

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🕒 Updated: 04 Feb 2026, 06:40 AM

क्या इंदौर में बेकाबू हो रही है आवारा कुत्तों की समस्या? बढ़ती संख्या से लोगों की बढ़ी चिंता

INDORE NEWS:   शहर में आवारा कुत्तों (stray dogs) के काटने की घटनाएं (bite incidents)  लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन इसके बावजूद नगर निगम (Despite Municipal Corporation) ने अब तक कोई ठोस (any solid)  और असरदार कदम नहीं उठाए (Effective steps were not taken) हैं।

 

 

 

 

 

 

 

 

हाईकोर्ट के निर्देशों (High Court instructions) के बाद भी ज़मीनी हालात (ground conditions) में कोई खास बदलाव नहीं आया है। करीब दो महीने पहले सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)  ने देश भर (across the country) की शहरी संस्थाओं (urban institutions) को सार्वजनिक जगहों (public places) से आवारा कुत्तों को हटाकर डॉग शेल्टर होम में ट्रांसफर (Stray dogs removed and transferred to dog shelter homes) करने का निर्देश दिया था। नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक, शहर में दो लाख से ज़्यादा आवारा कुत्ते (Stray Dogs) हैं और हर दिन औसतन 200 लोगों को कुत्ते काट रहे हैं। अभी देवगुराड़िया ट्रेंचिंग ग्राउंड स्थित एकमात्र डॉग शेल्टर होम (The only dog ​​shelter home located at Devguradia Trenching Ground) की क्षमता सिर्फ़ 200 कुत्तों की है। निगम प्रशासन (corporate administration) का कहना है कि नए डॉग शेल्टर होम के लिए तीन-चार जगहें देखी गई हैं लेकिन अभी तक कोई जगह फाइनल नहीं (not final) हुई है। ऐसे में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या (The growing problem of stray dogs) को लेकर नागरिकों की चिंता लगातार बढ़ (Citizens’ concerns continue to grow) रही है।

 

 

 

 

 

 

 

इनका कहना है…

इस समय यह सोचने वाली बात है कि आवारा कुत्ते सार्वजनिक जगहों (Stray dogs in public places) पर कहां पहुंच जाते हैं। झुग्गी-झोपड़ियों (slums) और मोहल्लों (neighborhoods) को टारगेट किया जाना (to be targeted) चाहिए। वहां इनकी संख्या ज़्यादा है।

 

 

 

 

 

– जैकब अली

शहर का कोई ऐसा इलाका (area) नहीं है जहां आज भी आवारा कुत्तों का झुंड न (No stray dogs) दिखे, जिससे साफ़ पता चलता है कि कोई पहल नहीं (no initiative) की गई है।

 

 

 

 

– मुन्नालाल आर्य

कुत्तों के काटने के शिकार ज़्यादातर (Most dog bite victims) बच्चे, औरतें और बुज़ुर्ग होते हैं। शहर में आवारा कुत्तों की समस्या (The problem of stray dogs) बढ़ती जा रही है। हालात को देखते हुए, लापरवाही से निपटना आसान (easy to handle carelessly) नहीं होगा।

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