Rewa MP:आग से खेल, रामगोविंद पैलेस समेत 32 ऊंची इमारतें बिना फायर NOC, कोचिंग में पढ़ रहे सैकड़ों छात्र, प्रशासन बना धृतराष्ट्र!
लखनऊ अग्निकांड के बाद भी नहीं चेता प्रशासन,रमागोविंद पैलेस समेत 5 मंजिल से ऊंची ज्यादातर बिल्डिंगों में नहीं हैं सुरक्षा इंतजाम
रीवा। लखनऊ के कोचिंग संस्थान में आग लगने से कई मासूमों की जान चली गई, लेकिन रीवा अब भी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है। नगर निगम के फायर ऑडिट में खुलासा हुआ है कि शहर की 32 मंजिल से ऊंची अधिकांश इमारतों के पास फायर एनओसी तक नहीं है।
कोचिंग का गढ़, पर सुरक्षा शून्य
सिरमौर चौराहा स्थित रमागोविंद पैलेस कोचिंग सेंटरों से अटा पड़ा है। यहां सैकड़ों छात्र पढ़ते हैं, लेकिन बिल्डिंग में आग बुझाने का कोई इंतजाम नहीं है। अगर आग लगी तो कइयों की जान पर बन आएगी। एनबीसी नॉर्म्स के तहत ऊंची बिल्डिंगों में फायर एनओसी, एग्जिट और हाइड्रेंट जरूरी हैं, पर यहां सबकुछ नदारद है।
मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल भी फेल
शर्मनाक बात यह है कि मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल जैसी सरकारी इमारतों में भी फायर सेफ्टी के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। आईसीयू, वार्ड और लिफ्ट में फंसे मरीजों को निकालना भी मुश्किल होगा।
इन जगहों पर सबसे ज्यादा खतरा
नगर निगम की टीम ने पद्मा से सिरमौर चौराहा तक सर्वे किया। रामागोविंद पैलेस, आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, संजय गांधी अस्पताल, हेरिटेज होटल, लैंडमार्क, रामा पैलेस, सूर्य होटल, चंद्रलोक होटल और मॉल संचालित शाही होटल के पास भी एनओसी नहीं है। कई बिल्डिंगों में लगे फायर सिस्टम खराब या एक्सपायर हैं।
नगर निगम की चेतावनी
निगम प्रशासन ने नोटिस जारी कर 5 मंजिल से ऊंची सभी बिल्डिंगों को फायर ऑडिट रिपोर्ट और एनओसी जमा करने को कहा है। समय पर व्यवस्था न करने वालों के खिलाफ सीज करने की कार्रवाई होगी।
स्थानीय लोगों में डर
रोजाना सैकड़ों छात्र-छात्राएं और मरीज इन इमारतों में आते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन सिर्फ हादसे के बाद जागता है। लखनऊ जैसी घटना दोहराई तो जिम्मेदार कौन होगा?





