Mauganj MP:मऊगंज में दशहरा उत्सव के आमंत्रण पत्र पर उठे प्रोटोकॉल के सवाल, सांसद और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष का नाम गायब!
जिला स्तरीय आयोजन के कार्ड से जनार्दन मिश्रा और गिरीश गौतम के नाम नदारद, भाजपा जिलाध्यक्ष राजेन्द्र मिश्रा का भी उल्लेख नहीं; नगर परिषद और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
मऊगंज। मऊगंज में जिला स्तरीय दशहरा उत्सव को लेकर जारी आमंत्रण पत्र अब आयोजन से ज्यादा प्रोटोकॉल और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा का विषय बन गया है। नगर परिषद द्वारा वितरित किए जा रहे आमंत्रण पत्र में जिले के सांसद जनार्दन मिश्रा और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं देवतालाब विधायक गिरीश गौतम का नाम दिखाई नहीं दे रहा है। वहीं भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र मिश्रा का नाम भी आमंत्रण पत्र में शामिल नहीं होने की बात सामने आई है।
जिला मुख्यालय पर आयोजित होने वाले इस बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम के आमंत्रण पत्र में जनप्रतिनिधियों के नामों को लेकर सामने आई इस स्थिति ने प्रशासनिक स्तर पर प्रोटोकॉल के पालन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आखिर किस स्तर पर हुई चूक?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि यह आयोजन जिला स्तरीय है और प्रशासनिक स्तर पर इसकी तैयारियां की जा रही हैं, तो आमंत्रण पत्र तैयार करते समय जिले के प्रमुख जनप्रतिनिधियों के नाम किस आधार पर तय किए गए?
क्या आमंत्रण पत्र तैयार करने से पहले संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रोटोकॉल सूची का परीक्षण नहीं किया? या फिर जनप्रतिनिधियों के नाम जानबूझकर शामिल नहीं किए गए?
इन सवालों का जवाब अब प्रशासन और नगर परिषद की ओर से अपेक्षित है।
सांसद और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष का नाम गायब होने से बढ़ी चर्चा
आमंत्रण पत्र में सांसद जनार्दन मिश्रा और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं देवतालाब विधायक गिरीश गौतम जैसे वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों के नाम नहीं होने से राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
वहीं भाजपा जिलाध्यक्ष राजेन्द्र मिश्रा का नाम भी आमंत्रण पत्र में नहीं होने को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं में नाराजगी की बात कही जा रही है।
लोगों का सवाल है कि जब जिला मुख्यालय पर होने वाले सरकारी अथवा प्रशासनिक आयोजन में ही जनप्रतिनिधियों के सम्मान और प्रोटोकॉल को लेकर लापरवाही के सवाल उठ रहे हैं, तो फिर प्रशासनिक व्यवस्था की संवेदनशीलता पर भरोसा कैसे किया जाए?
पहले भी सवालों में रही है प्रशासनिक कार्यप्रणाली
मऊगंज में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर इससे पहले भी अलग-अलग मामलों में सवाल उठते रहे हैं। अब दशहरा उत्सव के आमंत्रण पत्र में प्रमुख जनप्रतिनिधियों के नाम नहीं होने से एक बार फिर प्रशासन की कार्यशैली चर्चा के केंद्र में आ गई है।
हालांकि यह स्पष्ट होना बाकी है कि आमंत्रण पत्र में नाम छूटने के पीछे प्रोटोकॉल संबंधी चूक, मुद्रण संबंधी त्रुटि या कोई अन्य प्रशासनिक कारण है।
अब प्रशासन के जवाब पर टिकी नजर
मामला सामने आने के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या प्रशासन इस चूक को स्वीकार कर आमंत्रण पत्र में सुधार करेगा? क्या नगर परिषद या संबंधित अधिकारी यह स्पष्ट करेंगे कि आमंत्रण पत्र तैयार करते समय प्रोटोकॉल का पालन किस आधार पर किया गया?
जिला स्तरीय आयोजन में आमंत्रण पत्र केवल औपचारिकता नहीं होता, बल्कि उसमें शामिल नाम प्रशासनिक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का भी संकेत देते हैं। ऐसे में वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों के नाम गायब होने की वजह स्पष्ट करना प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है।
फिलहाल दशहरा उत्सव से ज्यादा चर्चा इस बात की है कि आखिर मऊगंज में प्रोटोकॉल की यह चूक हुई कैसे—और इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?





