दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देशों में शामिल चीन आज एक गंभीर मोड़ पर खड़ा है। यहाँ जन्मदर लगातार गिर रही है और कुल जनसंख्या घटने लगी है। पिछले साल चीन में केवल 79.2 लाख बच्चे पैदा हुए, जो 1949 के बाद से सबसे कम संख्या है। जन्मदर प्रति हजार आबादी केवल 5.63 रही, जो नए बच्चों की संख्या में तेज गिरावट को दर्शाता है। इसके साथ ही 2025 में चीन की कुल आबादी लगभग 33.9 लाख घट गई, जो लगातार चौथे साल की गिरावट है। इस तरह के आंकड़े चीन के लिए जनसांख्यिकीय संकट की बड़ी चेतावनी साबित हो रहे हैं।
घटती आबादी के पीछे के कारण
चीन में जन्मदर गिरने के पीछे कई सामाजिक और आर्थिक कारण हैं। सबसे बड़ा कारण बच्चों को पालने-पोसने का बढ़ता महंगाई भरा खर्च है। शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास की लागत लगातार बढ़ रही है, जिससे युवा दंपतियों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है। इसके अलावा ‘4-2-1 फैमिली स्ट्रक्चर’ भी एक बड़ी समस्या है, जिसमें पति-पत्नी दोनों अकेले बच्चे होते हैं और उन्हें चार बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल करनी होती है। इस वजह से बच्चे पैदा करने का मन कम होता है। शादी की दर भी अब ऐतिहासिक निचले स्तर पर आ चुकी है, जो सीधे बच्चों की संख्या को प्रभावित कर रही है। युवा देर से शादी कर रहे हैं या शादी ही नहीं कर रहे, जिससे जन्मदर पर असर पड़ रहा है।
सरकार के प्रयास और उनका असर
चीन सरकार ने जन्मदर बढ़ाने के लिए कई उपाय शुरू किए हैं। जनवरी 2026 से तीन साल से कम उम्र के हर बच्चे वाले परिवार को करीब 500 डॉलर सालाना की सब्सिडी दी जा रही है। सरकारी किंडरगार्टन की फीस माफ कर दी गई है और कंडोम जैसे गर्भनिरोधक सामानों पर टैक्स भी लगाया गया है ताकि लोग बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित हों। लेकिन इन प्रयासों के बावजूद स्थिति में खास सुधार नहीं दिख रहा। चीन अभी भी विश्व के उन देशों में शामिल है जहां जन्मदर सबसे कम है। आर्थिक प्रोत्साहन के बावजूद सामाजिक और सांस्कृतिक बाधाओं को दूर करना अब सबसे बड़ा चुनौती बन गया है।
तेजी से बूढ़ा होता समाज और भविष्य की चुनौतियां
चीन की आबादी तेजी से बूढ़ी होती जा रही है। देश की लगभग 23 प्रतिशत आबादी 60 साल से अधिक उम्र की है और अनुमान है कि 2035 तक बुजुर्गों की संख्या 40 करोड़ तक पहुंच सकती है। इससे कामकाजी उम्र की आबादी घटेगी, जिससे श्रमबल पर दबाव पड़ेगा। इसके साथ ही पेंशन, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा प्रणाली पर भी भारी बोझ आएगा। संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार, यदि यही स्थिति रही, तो 2100 तक चीन की जनसंख्या घटकर करीब 80 करोड़ रह सकती है। यह संकट सिर्फ जनसंख्या की कमी का नहीं बल्कि चीन के पूरे विकास मॉडल के लिए बड़ा इम्तिहान साबित होगा। चीन की आर्थिक वृद्धि, वैश्विक ताकत और सामाजिक स्थिरता पर इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा।





