1947 तक भारत और पाकिस्तान एक ही देश थे, जहाँ लोगों की जेनेटिक्स, संस्कृति और जीवनशैली काफी हद तक समान थी। लेकिन आज जब दोनों देशों की महिलाओं की औसत लंबाई की बात आती है, तो अक्सर सवाल उठते हैं कि क्या सच में भारत की लड़कियां पाकिस्तान की लड़कियों से लंबी हैं? आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि भारत और पाकिस्तान की महिलाओं की औसत लंबाई में अंतर बहुत कम है। भारत में महिलाओं की औसत लंबाई लगभग 152 से 155 सेंटीमीटर के बीच है, जबकि पाकिस्तान में यह लगभग 154 सेंटीमीटर है। यह फर्क मात्र एक से दो सेंटीमीटर का है। हालांकि पिछले दशकों में भारतीय महिलाओं की लंबाई में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है, जो पाकिस्तान की महिलाओं से थोड़ी अधिक है।
पोषण और आहार: लंबाई के विकास का अहम कारक
लंबाई के विकास में पोषण की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है, खासकर बचपन और किशोरावस्था के दौरान। भारत में आर्थिक विकास के साथ-साथ शहरीकरण ने पोषण स्तर में सुधार किया है। सरकारी योजनाएं जैसे मिड डे मील, ICDS और मातृ पोषण योजनाएं लड़कियों को बेहतर कैलोरी और प्रोटीन प्राप्त करने में मदद कर रही हैं। दूध, दाल, फल और फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ने से भारत में लड़कियों की शारीरिक वृद्धि में सुधार हुआ है। दूसरी तरफ, पाकिस्तान में गरीबी और खाद्य सुरक्षा के मुद्दे अभी भी चुनौती बने हुए हैं। कुछ क्षेत्रों में लड़कियों को लिंग आधारित पोषण की कमी भी देखी जाती है, जिससे उनकी लंबाई बढ़ने की क्षमता प्रभावित होती है। कुपोषण का असर लंबे समय तक शरीर की वृद्धि को सीमित कर देता है, जिसके कारण महिलाओं की औसत लंबाई पर फर्क पड़ता है।
स्वास्थ्य सेवाओं और बचपन की बीमारियों का प्रभाव
स्वास्थ्य सेवा का स्तर भी लंबाई के विकास में एक बड़ा कारक है। भारत ने टीकाकरण कवरेज बढ़ाकर, स्वच्छता में सुधार कर और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को बेहतर बनाकर बचपन में होने वाली बीमारियों को कम किया है। इससे शरीर अपनी ऊर्जा बीमारी से लड़ने के बजाय विकास के लिए खर्च कर पाता है, जिससे लंबाई में सुधार होता है। वहीं, पाकिस्तान के ग्रामीण इलाकों में सीमित स्वास्थ्य सेवाओं, उच्च एनीमिया दर और खराब स्वच्छता के कारण बच्चों में बार-बार बीमारियां होती हैं। बार-बार बीमार पड़ना शारीरिक विकास को रोकता है और इससे लंबाई कम हो जाती है।
जल्दी शादी का लंबाई पर असर और सामाजिक बदलाव
पाकिस्तान में बाल विवाह अब भी अधिक प्रचलित है, खासकर ग्रामीण और रूढ़िवादी इलाकों में। जब लड़कियां पूरी तरह से विकसित होने से पहले ही शादी कर लेती हैं और जल्दी मां बन जाती हैं, तो उनका शारीरिक विकास रुक जाता है। भारत में भी यह समस्या थी, लेकिन सख्त कानूनों, बेहतर शिक्षा और शहरीकरण के कारण कम उम्र में शादी की दर में कमी आई है। इससे लड़कियों को अपना विकास पूरा करने का मौका मिला है, जिससे उनकी औसत लंबाई में सुधार हुआ है। इसलिए, सामाजिक और आर्थिक बदलावों ने भारत में लड़कियों की शारीरिक वृद्धि में सकारात्मक प्रभाव डाला है।





