मुम्बई नगर निगम चुनाव से पहले ठाकरे भाइयों, उद्धव और राज ठाकरे ने मराठी पहचान, मराठी भाषा और मुम्बई के महाराष्ट्र से अलग होने जैसे मुद्दों को खूब उभारा। उन्होंने इन मुद्दों को अपने चुनावी प्रचार में जोर-शोर से इस्तेमाल किया ताकि मराठी वोटरों को अपने पक्ष में किया जा सके। लेकिन इसके बावजूद इस बार मुम्बई नगर निगम में रिकॉर्ड 80 गैर-मराठी भाषी कॉरपोरेटर्स चुने गए हैं। यह संख्या अब तक के किसी भी चुनाव में सबसे अधिक है। इस बढ़ोतरी ने ठाकरे भाइयों की रणनीति को कुछ हद तक चुनौती दी है और यह दर्शाता है कि मुम्बई की सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य में व्यापक बदलाव आ रहा है।
पार्टीवार गैर-मराठी कॉरपोरेटर्स की संख्या
इस बार भाजपा में कुल 38 गैर-मराठी कॉरपोरेटर्स चुने गए हैं, जो किसी भी पार्टी में सबसे ज्यादा है। कांग्रेस के 24 कॉरपोरेटर्स में से 18 गैर-मराठी हैं, जबकि AIMIM के सभी आठ कॉरपोरेटर्स गैर-मराठी हैं। समाजवादी पार्टी के दोनों कॉरपोरेटर्स भी गैर-मराठी हैं। उद्धव ठाकरे के शिव सेना (UBT) में 65 कुल कॉरपोरेटर्स में से छह गैर-मराठी हैं, और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) में छह में से एक गैर-मराठी कॉरपोरेटर है। शिवसेना शिंदे गुट के 29 में से तीन गैर-मराठी कॉरपोरेटर्स हैं। यह आंकड़ा मुम्बई की बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है।
भाजपा की प्रतिक्रिया और मुम्बई की बदलती सामाजिक तस्वीर
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला का मानना है कि मुम्बई एक बहुभाषी और सांस्कृतिक रूप से विविधता वाला महानगर है, जहाँ सभी समुदाय, जाति और धर्मों के लोगों को स्थान मिलता है। इस वजह से मुम्बई नगर निगम में सभी का प्रतिनिधित्व होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि मुम्बई जैसा शहर, जहाँ फेरोजशाह मेहता जैसे मेयर रहे जिन्होंने ईरान से आए पूर्वजों के साथ यहाँ बसे, वहाँ भाषा के नाम पर विभाजनकारी राजनीति नहीं चल सकती। प्रेम शुक्ला ने इसे मुम्बई की वास्तविक सामाजिक स्थिति का प्रतिबिंब बताया।
फडणवीस का ठाकरे भाइयों के एजेंडे पर तंज
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ठाकरे भाइयों की मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की धमकी पर पलटवार किया है। फडणवीस ने कहा कि मुंबई को महाराष्ट्र से कोई भी अलग नहीं कर सकता, न तो किसी के पूर्वज और न ही उनके पूर्वजों के पूर्वज। भाजपा ने इस चुनाव में 89 सीटें जीतते हुए साबित किया कि मराठी वोटर्स केवल शिवसेना (UBT) और MNS के लिए नहीं हैं। भाजपा ने 51 मराठी कॉरपोरेटर्स को भी चुनकर यह साफ कर दिया कि मराठी पहचान के मुद्दे पर पार्टी मजबूत है और ठाकरे भाइयों के विरोध के बावजूद मराठी वोटरों का समर्थन भी बरकरार है।





