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Zomato में बड़ा नेतृत्व बदलाव: दीपिंदर गोयल के बाद CEO कौन बनेगा?

By: संवाददाता । विराट वसुंधरा

On: Wednesday, January 21, 2026 5:48 PM

Zomato में बड़ा नेतृत्व बदलाव: दीपिंदर गोयल के बाद CEO कौन बनेगा?
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🕒 Updated: 23 Jan 2026, 09:33 AM

देश की सबसे बड़ी फूड डिलीवरी कंपनियों में शुमार ज़ोमैटो में हाल ही में एक बड़ा नेतृत्व बदलाव हुआ है। इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह कंपनी के संस्थापक और ग्रुप CEO दीपिंदर गोयल का पद से हटना है। जनवरी 2026 में ज़ोमैटो की पैरेंट कंपनी इटरनल ने यह घोषणा की कि गोयल ग्रुप CEO के पद से हटेंगे और 1 फरवरी 2026 से यह बदलाव लागू हो जाएगा। हालांकि गोयल कंपनी से पूरी तरह दूर नहीं होंगे, बल्कि वाइस चेयरमैन के पद पर रहकर रणनीतिक फैसलों में योगदान देते रहेंगे। कंपनी के मुताबिक यह बदलाव भविष्य की ग्रोथ को ध्यान में रखकर और मैनेजमेंट को और मज़बूत बनाने के लिए किया गया है। इस कदम का मकसद ज़ोमैटो को एक नई दिशा देना और तेजी से बदलते फूड डिलीवरी मार्केट में बेहतर प्रतिस्पर्धा करना है।

दीपिंदर गोयल के जाने के बाद ज़ोमैटो और इसके ग्रुप की बाकी कंपनियों जैसे Blinkit की कमान अब अलबिंदर सिंह ढिंडसा को सौंपी गई है। ढिंडसा फिलहाल Blinkit के CEO के रूप में काम कर रहे थे और उनके नेतृत्व में Blinkit ने क्विक कॉमर्स सेक्टर में जबरदस्त ग्रोथ हासिल की है। उनकी रणनीति और टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को कंपनी के लिए काफी सफल माना जाता है। अब कंपनी को उम्मीद है कि अलबिंदर का अनुभव ज़ोमैटो के फूड डिलीवरी बिजनेस को प्रॉफिटेबल बनाने और विस्तार करने में भी सहायक होगा। उनके पास तकनीकी दक्षता और मार्केट की समझ का ऐसा अनूठा मिश्रण है जो ज़ोमैटो की नई चुनौतियों से निपटने में मदद करेगा।

अलबिंदर सिंह ढिंडसा टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप क्षेत्र में एक जाना-माना नाम हैं। उन्होंने लंबे समय तक ज़ोमैटो के साथ काम किया और बाद में Blinkit को सफलता की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनकी खासियत यह है कि वे डेटा और टेक्नोलॉजी के साथ ग्राउंड लेवल के ऑपरेशंस को भी गहराई से समझते हैं। एक प्रैक्टिकल लीडर के तौर पर उनकी सोच कंपनी के लिए महत्वपूर्ण साबित होती है। उनकी लीडरशिप में कंपनी को उम्मीद है कि ज़ोमैटो न केवल कारोबार में विस्तार करेगा बल्कि लाभप्रदता भी बेहतर बनाएगा। इसके अलावा, उनकी रणनीतिक सोच से कंपनी को भविष्य की नई चुनौतियों का सामना करने में मजबूती मिलेगी।

नए CEO के बारे में एक जिज्ञासा सोशल मीडिया और इंटरनेट पर तेजी से उभर रही है कि वे किस धर्म से जुड़े हैं। इस सवाल का जवाब साफ है कि किसी भी लीडर की व्यक्तिगत धार्मिक आस्था सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं होती और अलबिंदर ने कभी भी अपने धर्म को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। हालांकि उनके उपनाम ‘ढिंडसा’ से यह अंदाजा लगाया जाता है कि वे पंजाब के पटियाला से हैं और आमतौर पर यह नाम सिख समुदाय से जुड़ा माना जाता है। लेकिन केवल नाम या क्षेत्र के आधार पर किसी की आस्था तय करना सही नहीं होगा। कंपनी और ढिंडसा की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इस लिहाज से उनके पेशेवर कौशल और नेतृत्व पर ही ध्यान केंद्रित करना बेहतर होगा बजाय व्यक्तिगत मामलों पर चर्चा के।

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