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2029 लोकसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा में युवा नेताओं को मिलेंगे प्रमुख पद

2029 लोकसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा में युवा नेताओं को मिलेंगे प्रमुख पद
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🕒 Updated: 23 Jan 2026, 09:33 AM

भाजपा आगामी राजनीतिक दौर के लिए खुद को मजबूत बनाने की तैयारी में जुट गई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, नितिन नवीन के भाजपा अध्यक्ष बनने की संभावना और मोदी सरकार 3.0 के दो वर्ष पूरे होने से पहले संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर बदलाव का एक बड़ा क्रम शुरू होने वाला है। भाजपा राष्ट्रीय संगठन टीम को जल्द ही पुनर्गठित किया जाएगा, जिसमें युवाओं को प्रमुख जिम्मेदारियां दी जाएंगी। अधिकांश नए पदाधिकारी 55 वर्ष से कम उम्र के होंगे। राज्यों से नए चेहरे लेकर आए जाएंगे और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर अहम जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इस बदलाव का मकसद पार्टी को नई ऊर्जा देना और लंबे समय तक राज करने वाली भाजपा को भविष्य की राजनीतिक चुनौतियों के लिए तैयार करना है।

2029 लोकसभा चुनावों पर विशेष ध्यान और पार्टी की मजबूती

भाजपा के नेतृत्व का फोकस 2029 के लोकसभा चुनावों पर केंद्रित है। पार्टी का उद्देश्य संगठन को और मजबूत बनाना, कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाना और अपने राजनीतिक संदेश को प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाना है। नए संगठनात्मक ढांचे में उन नेताओं को प्राथमिकता दी जाएगी जो पार्टी के विचारधारा के प्रति प्रतिबद्ध हैं और जिनका RSS के साथ जुड़ाव है। इसके साथ ही, संगठन के बाहर के कुछ नेताओं को भी शामिल किया जा सकता है ताकि पार्टी का जनाधार और भी विस्तृत हो सके। आर्थिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह बदलाव भाजपा की दीर्घकालीन रणनीति का हिस्सा हैं ताकि पार्टी लगातार सत्ता में बनी रहे और विभिन्न सामाजिक वर्गों को अपने साथ जोड़े रखे।

मंत्रिमंडल के प्रदर्शन की समीक्षा और संभावित फेरबदल

सरकारी स्तर पर भी महत्वपूर्ण बदलावों की तैयारी हो रही है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल के सदस्यों के प्रदर्शन और जिम्मेदारियों की समीक्षा की जा रही है। 2021 के बाद से मंत्रिमंडल में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। कई मंत्री दो-दो विभाग संभाल रहे हैं और कुछ अपने राजनीतिक जीवन के अंतिम चरण में हैं। नए संगठनात्मक बदलावों के साथ मंत्रिमंडल में भी फेरबदल हो सकता है। इससे सरकार के कामकाज में तेजी आएगी और नई ऊर्जा का संचार होगा। बिहार और राजस्थान में कैबिनेट फेरबदल की संभावना है, जबकि मणिपुर में सरकार गठन के प्रयास अंतिम चरण में हैं।

भाजपा-शासित राज्यों और राज्यसभा सीटों में बदलाव की योजना

भाजपा-शासित राज्यों में भी परिस्थितियों के अनुसार बड़े बदलावों पर विचार चल रहे हैं। खासकर उत्तर प्रदेश में सामाजिक संतुलन को लेकर चर्चा हो रही है, जिसमें दलित नेता को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने का विकल्प भी शामिल है। इसके अलावा, अगले वर्ष राज्यसभा की 70 से अधिक सीटें खाली होने वाली हैं, जिसमें करीब 30 भाजपा सांसदों का सेवानिवृत्ति भी शामिल है। पार्टी का लक्ष्य कम से कम 33 सीटें जीतना है। उम्मीदवारों के चयन में संगठन की जरूरतें, प्रशासनिक अनुभव और सामाजिक समीकरणों को महत्व दिया जाएगा। इन रणनीतिक बदलावों से भाजपा आगामी चुनावों में मजबूत स्थिति में प्रवेश करना चाहती है और भारतीय राजनीति में अपनी पकड़ और मजबूत बनाना चाहती है।

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