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अगर अखंड भारत होता आज भी तो चीन को पछाड़कर सबसे बड़ा देश बनता

अगर अखंड भारत होता आज भी तो चीन को पछाड़कर सबसे बड़ा देश बनता
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🕒 Updated: 23 Jan 2026, 09:33 AM

कल्पना कीजिए कि भारत का बंटवारा कभी नहीं हुआ होता और उपमहाद्वीप आज भी एक साथ एक अखंड राष्ट्र के रूप में मौजूद होता। ऐसा होता तो न केवल इतिहास की दिशा बदल जाती, बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा आबादी वाला देश भी चीन नहीं बल्कि अखंड भारत होता। अखंड भारत की अवधारणा में आज का भारत ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, नेपाल, भूटान, म्यांमार, श्रीलंका और मालदीव भी शामिल होते। यह पूरा क्षेत्र सदियों तक सांस्कृतिक और सामाजिक रूप से जुड़ा रहा है, लेकिन 20वीं सदी में राजनीतिक कारणों से यह अलग-अलग देशों में विभाजित हो गया। अगर यह देश आज भी एक साथ होते, तो उनकी जनसंख्या, भूगोल और वैश्विक प्रभाव का स्वरूप कितना विशाल होता, यह जानना रोचक होगा।

जनसंख्या और क्षेत्रफल: चीन को टक्कर

अगर अखंड भारत आज होता, तो इसकी कुल जनसंख्या लगभग 1.9 से 2.1 अरब के बीच होती, यानी करीब 190 से 210 करोड़ लोगों की आबादी होती। मौजूदा भारत की आबादी लगभग 143 करोड़ है। इसमें पाकिस्तान की करीब 24 से 25 करोड़ और बांग्लादेश की लगभग 17 करोड़ की आबादी जोड़ें तो यह संख्या और भी बढ़ जाती है। इसके अलावा अफगानिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार, भूटान और मालदीव की आबादी भी करीब 15 से 20 करोड़ के आसपास होती। इस तरह यह अखंड भारत चीन की लगभग 142 करोड़ की आबादी से 60 से 70 करोड़ ज्यादा बड़ा देश बन जाता। केवल जनसंख्या के आधार पर ही इसका वैश्विक प्रभाव चीन से कई गुना अधिक माना जाता। क्षेत्रफल की बात करें तो अखंड भारत का कुल क्षेत्रफल लगभग 7.1 मिलियन वर्ग किलोमीटर होता, जो मौजूदा भारत के क्षेत्रफल से लगभग दोगुना है।

जनसंख्या घनत्व और विकास के आयाम

अखंड भारत का इतना बड़ा क्षेत्रफल होने के कारण जनसंख्या घनत्व आज के भारत की तुलना में काफी कम होता। वर्तमान में भारत में प्रति वर्ग किलोमीटर औसतन 415 लोग रहते हैं, जबकि अखंड भारत में यह आंकड़ा घटकर करीब 260 से 270 तक आ जाता। इसका मतलब यह है कि भले ही आबादी बहुत बड़ी हो, लेकिन भूमि पर जनसंख्या का दबाव कम होता। इस विशाल क्षेत्र में संसाधनों का बेहतर बंटवारा संभव होता और विकास के लिए अवसर अधिक मिलते। इतना बड़ा बाजार होने के कारण यह देश वैश्विक व्यापार के केंद्र के रूप में भी उभरता। युवा आबादी के अनुपात में वृद्धि से अखंड भारत को बड़ा जनसांख्यिकीय लाभ भी मिलता, जबकि चीन आज बूढ़ी होती आबादी की समस्या से जूझ रहा है।

चुनौतियां और वैश्विक ताकत

हालांकि इतनी बड़ी आबादी के साथ प्रशासन, संसाधनों का वितरण, सामाजिक समानता और सांस्कृतिक विविधता की चुनौतियां भी बहुत बड़ी होतीं। अलग-अलग क्षेत्र और समुदायों के बीच सामंजस्य बनाए रखना आसान नहीं होता। विकास की गति में असमानता और राजनीतिक विवाद भी बढ़ सकते थे। फिर भी जनसंख्या और क्षेत्रफल के आधार पर अखंड भारत की गिनती दुनिया के सबसे प्रभावशाली देशों में होती। आर्थिक शक्ति, श्रम शक्ति और बाजार के चलते यह देश वैश्विक मंच पर एक मजबूत और प्रभावशाली खिलाड़ी के रूप में उभरता। इसलिए, यह कल्पना न केवल इतिहास के परिदृश्य को बदलती, बल्कि आज की वैश्विक राजनीति और आर्थिक व्यवस्था को भी पूरी तरह से नया रूप दे सकती थी।

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