2026 से पहले सोना-चांदी की कीमतों पर ऐतिहासिक उबाल देखने को मिला, अब सवाल यह है कि सस्ता होगा या बढ़ेगी कीमतें, निवेशकों के लिए अहम संकेत?
New Delhi: 1 फरवरी, 2026 को पेश (present) होने वाले आने वाले यूनियन बजट (union budget) से पहले इन्वेस्टर्स और आम लोगों में सोने (gold) और चांदी (Silver) की कीमतों को लेकर उत्साह चरम पर है। बुलियन मार्केट एक्सपर्ट्स (Bullion Market Experts) और ज्वैलर्स एसोसिएशन ने सरकार (Jewellers Association has requested the government) से सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी (import duty) में और कटौती करने की मांग की है। अगर फाइनेंस मिनिस्टर बजट (finance minister budget) में ड्यूटी कम करने का फैसला करती हैं, तो घरेलू मार्केट में सोने की कीमतों (Gold prices in the domestic market) में तुरंत 2,000 से 4,000 रुपये प्रति 10 ग्राम की राहत मिल सकती है। ड्यूटी में कमी से न सिर्फ कीमतें (just prices) कम होंगी, बल्कि सोने की स्मगलिंग (gold smuggling) पर भी रोक लगेगी और मार्केट में ट्रांसपेरेंसी आएगी।
सोने की कीमतों (gold prices) पर इंटरनेशनल पॉलिटिक्स (International politics) और US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप की पॉलिसी (US President Donald Trump’s policy) का भी गहरा असर पड़ रहा है। ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी और मजबूत होते डॉलर की वजह से दुनिया भर में सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। अगर बजट के समय डॉलर इंडेक्स में मजबूती बनी रहती है, तो भारतीय मार्केट (Indian market) में सोना ज्यादा महंगा होने की उम्मीद नहीं है। हालांकि, 22 जनवरी को गोल्ड और सिल्वर ETF में आई 12-21% की हालिया गिरावट को एक्सपर्ट्स (Experts on decline) ‘प्री-बजट प्रॉफिट बुकिंग’ मान रहे हैं, जिससे फिलहाल मार्केट में अनिश्चितता (Currently there is uncertainty in the market) बनी हुई है।
बजट के बाद दो हालात बन सकते हैं। अगर सरकार मिडिल क्लास (government middle class) को राहत देते हुए ड्यूटी कम करती है, तो सोना ₹70,000 से ₹72,000 की रेंज में आ सकता है। इसके उलट, अगर करंट अकाउंट डेफिसिट को देखते हुए ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया, तो शादियों के सीजन की डिमांड (Demand for wedding season) के कारण कीमतें फिर से ₹80,000 के लेवल को छू सकती हैं। चांदी के मामले में, इंडस्ट्रियल डिमांड (industrial demand) बढ़ने पर इसके ₹95,000 प्रति kg को पार करने की संभावना है। छोटे इन्वेस्टर्स को सलाह दी जा रही है कि वे कोई भी बड़ा इन्वेस्टमेंट (big investment) का फैसला लेने से पहले बजट के 2-3 दिन बाद तक मार्केट के स्टेबल (market stable) होने का इंतजार करें।





