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ईरान-अमेरिका युद्ध के 12वें दिन ट्रंप की ईरान को दोटूक चेतावनी, होर्मुज में माइंस बिछाने वाले जहाज नष्ट, भीषण संघर्ष में अब तक 1300 से अधिक लोगों की मौत

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🕒 Updated: 11 Mar 2026, 11:21 AM

ईरान-अमेरिका युद्ध के 12वें दिन ट्रंप की ईरान को दोटूक चेतावनी, होर्मुज में माइंस बिछाने वाले जहाज नष्ट, भीषण संघर्ष में अब तक 1300 से अधिक लोगों की मौत

ईरान, इज़राइल और यूनाइटेड स्टेट्स (united states) के बीच चल रहा युद्ध (war) आज 12वें दिन में पहुँच गया है। इज़राइल और U.S. मिलिट्री तेहरान समेत ईरान (Iran, including military Tehran) के अलग-अलग ठिकानों पर लगातार एयरस्ट्राइक (Continuous airstrikes on bases) कर रही है, जिसमें अब तक 1,300 से ज़्यादा लोगों के मारे जाने की आशंका (fear of being killed) है। अकेले तेहरान में 460 आम लोगों की जान जा चुकी है, जबकि लेबनान में हिज़्बुल्लाह और इज़राइल के बीच चल रही गोलाबारी से करीब 7.6 मिलियन लोग बेघर हो गए हैं। यूनाइटेड नेशंस ने इसे मानवीय संकट (The United Nations has declared it a humanitarian crisis) बताया है। इस बीच, UNESCO हेरिटेज साइट (heritage site) और इस्फ़हान में एक एलिमेंट्री स्कूल में धमाकों की खबरों से इंटरनेशनल लेवल पर गुस्सा फैल (News of the blasts sparked international outrage.) गया है, जिसमें बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों (A large number of school children) के मारे जाने की खबर है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

रणनीतिक रूप (strategic form) से अहम ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज’ (स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज) में तनाव (Tension) अपने चरम पर पहुँच गया है। US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान (US President Donald Trump on Iran) को चेतावनी दी है कि अगर समुद्र में मर्चेंट शिप को रोकने के लिए माइन बिछाई (If mines are laid at sea to stop merchant ships) गईं, तो इसके गंभीर नतीजे (serious consequences) होंगे। ताज़ा कार्रवाई में, U.S. मिलिट्री ने उन ईरानी शिप को निशाना बनाकर तबाह (targeted and destroyed) कर दिया है जिन पर आरोप (Blame) है कि वे माइन बिछाने (mine laying) के काम में लगे थे। इस बीच, ईरान की IRGC (IRGC) ने धमकी दी है कि अगर उन पर हमले नहीं रुके तो वे फारस की खाड़ी से एक लीटर भी तेल बाहर नहीं जाने देंगे। इस मिलिट्री रुकावट ने दुनिया भर के एनर्जी कॉरिडोर को हिलाकर रख (Shaking up energy corridors around the world) दिया है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

इस भीषण युद्ध का सीधा असर ग्लोबल मार्केट (The direct impact of the fierce war on the global market) और तेल की कीमतों (oil prices) पर दिख रहा है। क्रूड की कीमतें $120 प्रति बैरल तक पहुंचने के बाद अब $90 के आसपास अस्थिर बनी हुई हैं। तेल की अनिश्चित सप्लाई (uncertain supply of oil) के कारण, मिस्र और थाईलैंड जैसे देशों ने ‘इमरजेंसी फ्यूल’ बचाने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। हालांकि प्रेसिडेंट (Although the President) ट्रंप ने संकेत दिया है कि यह लड़ाई ‘जल्द’ खत्म हो सकती है, लेकिन ईरान फिलहाल (Iran currently) किसी भी सीज़फ़ायर पर बातचीत (Talks on ceasefire) करने से इनकार कर रहा है। इंटरनेशनल एजेंसियां (International Agencies) ​​इस बात पर नज़र रख रही हैं कि अगर यह लड़ाई लंबी खिंचती (the fight dragged on) है, तो क्या दुनिया भर में एनर्जी संकट (Is there a global energy crisis?) और महंगाई का एक नया दौर शुरू (A new era of inflation begins) हो सकता है।

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