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ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन ने ईरान को तेल बेचने पर डिस्काउंट क्यों दिया, होर्मुज में तनाव के बीच मार्केट में 14 (140 मिलियन) बैरल उतारने की तैयारी क्यों की?

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🕒 Updated: 22 Mar 2026, 06:45 AM

ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन ने ईरान को तेल बेचने पर डिस्काउंट क्यों दिया, होर्मुज में तनाव के बीच मार्केट में 14 (140 मिलियन) बैरल उतारने की तैयारी क्यों की?

डोनाल्ड ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन ने वेस्ट एशिया (Administration West Asia) में चल रहे युद्ध के चौथे हफ्ते (fourth week of war) में पहुंचने के बीच ग्लोबल मार्केट (Beach Global Market) में उतार-चढ़ाव को कम करने के लिए ईरान को कुछ समय के लिए लगभग 140 मिलियन बैरल कच्चा तेल(sell crude oil) बेचने की इजाज़त दी है। यह ग्लोबल डिमांड (global demand) के करीब डेढ़ दिन के बराबर है। इस फैसले का मकसद होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में रुकावट के कारण सप्लाई की चिंताओं (supply concerns) को कम करना है। एक तरफ, मिस्टर ट्रंप ने तनाव कम करने का संकेत दिया और ईरान के खिलाफ मिलिट्री ऑपरेशन ( Military operation against Iran)  को रोकने की मांग की। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका वेस्ट एशिया (America West Asia) में अपने मिलिट्री लक्ष्यों को पूरा करने के “काफी करीब” आ गया है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका ईरान की मिसाइल क्षमताओं, लॉन्चर और डिफेंस इंडस्ट्रियल फ्रेमवर्क (Defense Industrial Framework) को “पूरी तरह से कमजोर” कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को न्यूक्लियर क्षमता हासिल (Iran acquires nuclear capability) करने से रोकना और इस क्षेत्र में सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित (ensure the safety of colleagues) करना उनके मुख्य लक्ष्यों में से हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (social media platform) पर कहा, “US, इज़राइल, सऊदी अरब, कतर, यूनाइटेड अरब अमीरात, बहरीन और कुवैत जैसे सहयोगी देशों की सुरक्षा बहाल करने के करीब पहुंच गया है।” होर्मुज जलडमरूमध्य के भविष्य के मैनेजमेंट (future management) पर, मिस्टर ट्रंप ने कहा कि इसे उन देशों द्वारा कंट्रोल और मॉनिटर किया जाना चाहिए जो इसका इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर ज़रूरत पड़ी तो US सहयोग करेगा।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

हालांकि, इस इलाके में तनाव अभी भी बना हुआ है। हज़ारों अतिरिक्त U.S. मरीन और नौसेना के जवानों को तैनात किया जा रहा है, जो मिलिट्री (military) की तैयारी को दिखाता है। इस बीच, ईरान ने हिंद महासागर में मौजूद डिएगो गार्सिया में एक जॉइंट U.S.-UK मिलिट्री बेस पर मिसाइल हमला (missile attack on base) किया, जिसे U.S. अधिकारियों के अनुसार नाकाम कर दिया गया। ईरान इसका समर्थन करने वाला पहला क्षेत्रीय देश बन गया है, जबकि यूरोपीय देशों, जापान और कनाडा ने भी समर्थन जताया है। हालांकि, अभी तक किसी भी देश ने नौसेना की तैनाती (The country has deployed the Navy)  पर कोई ठोस वादा नहीं किया है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

ईरान ने यूनाइटेड (Iran United) अरब अमीरात को चेतावनी दी है कि अगर खाड़ी में उसके कब्ज़े वाले द्वीपों पर हमला हुआ तो वह रास अल-खैमाह जैसे बंदरगाह शहरों को निशाना बना सकता है। इस बीच, कुवैत और सऊदी अरब ने मिसाइल (missile) और ड्रोन हमलों को नाकाम करने की खबर दी है। ईरान ने इज़राइल पर मिसाइल हमले किए हैं, जिसके जवाब में इज़राइल ने बेरूत में हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर हमले किए हैं, जिससे इलाके में तनाव और बढ़ गया है।

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