Bhopal MP:नगर निगम में बड़ा साइबर घोटाला लोक अदालत के दिन लगाई ₹14.70 लाख की चपत!
IAS के हस्तक्षेप के बाद 1कप्यूटर ऑपरेटर और एक योजना प्रकोष्ठ कर्मचारी गिरफ्तार, एक महिला कर्मी भी रडार पर
भोपाल। राजधानी के नगर निगम में वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन सरकारी सिस्टम में सेंधमारी कर लाखों रुपए के फर्जीवाड़े का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बीती 14 मार्च 2026 को लोक अदालत का फायदा उठाकर अज्ञात जालसाजों ने वार्ड क्रमांक 33 की यूजर आईडी और पासवर्ड चोरी कर ₹14,69,798 की फर्जी RTGS/NEFT रसीदें काट दीं। मामले में प्रशासनिक सख्ती के बाद अरेरा हिल्स पुलिस ने नगर निगम के दो कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक महिला ऑपरेटर की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
आईडी-पासवर्ड हैक कर रची गई बड़ी साजिश
मामला वित्तीय वर्ष 2025-26 की समाप्ति के समय आयोजित अंतिम लोक अदालत का है। जोन क्रमांक 7 के वार्ड क्रमांक 33 के वार्ड प्रभारी रघुवीर तिवारी को जैसे ही भनक लगी कि उनकी आईडी से लगभग 14.70 लाख रुपए की फर्जी रसीदें जारी हो चुकी हैं, निगम में हड़कंप मच गया। वार्ड प्रभारी ने तुरंत जोनल अधिकारी और मुख्यालय के उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायत दर्ज कराई कि यह रसीदें उन्होंने नहीं काटी हैं, बल्कि किसी ने उनकी आईडी-पासवर्ड का कूटकरण (हैक) कर इस वारदात को अंजाम दिया है।
थानेदार ने साधी चुप्पी, तो IAS अधिकारी ने दिखाया कड़ा रुख
मुख्यालय के निर्देश पर वार्ड प्रभारी रघुवीर तिवारी ने थाना अरेरा हिल्स में आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए आवेदन दिया था। लेकिन, पुलिस द्वारा शुरुआती दौर में मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम भोपाल की अपर आयुक्त (राजस्व) अंजू अरुण कुमार (IAS) ने मोर्चा संभाला। उन्होंने थाना प्रभारी अरेरा हिल्स को एक सख्त पत्र लिखकर तत्काल कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। आईएएस अधिकारी के सीधे हस्तक्षेप के बाद पुलिस महकमे में खलबली मची और पुलिस ने त्वरित जांच शुरू की।
निगम के ही ‘भेदियों’ ने लंका ढहाई, FIR के बाद हिरासत में आरोपी
अरेरा हिल्स पुलिस की तकनीकी और जमीनी जांच में जो खुलासा हुआ, उसने निगम प्रशासन को चौंका दिया। इस पूरे फर्जीवाड़े के पीछे नगर निगम के ही भीतर बैठे कर्मचारी शामिल थे। पुलिस ने जांच के बाद कार्रवाई की है:
वार्ड क्रमांक 24 के ऑपरेटर सिराज उल हक (29 दिवसीय) को जांच में दोषी पाए जाने के बाद FIR दर्ज कर हिरासत में ले लिया गया है।
मोहम्मद समीर (लिपिक, योजना प्रकोष्ठ – 29 दिवसीय) को भी इस साजिश का मुख्य हिस्सा पाते हुए गिरफ्तार किया गया है।
वार्ड क्रमांक 42 की ऑपरेटर नाहिद की भूमिका भी इस पूरे खेल में संदिग्ध और संलिप्त पाई गई है, जिसका बकायदा पुलिस एफआईआर (FIR) में विवरण दर्ज किया गया है।
विभागीय सुरक्षा पर खड़े हुए बड़े सवाल
इस बड़ी धोखाधड़ी ने नगर निगम के ऑनलाइन टैक्स कलेक्शन और रसीद प्रणाली की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। 29 दिवसीय और संविदा पर रखे गए ऑपरेटरों के पास इतने संवेदनशील आईडी-पासवर्ड कैसे पहुंचे, इसकी भी परतें खुलना बाकी हैं। फिलहाल पुलिस पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ कर रही है कि इस खेल में निगम के और कौन-से बड़े अधिकारी या बाहरी तत्व शामिल हैं।





