🕒 Updated: 25 Jul 2026, 09:34 AM
Mauganj MP:समीक्षा बैठकों में सख्ती, ज़मीन पर सुस्ती मऊगंज में वर्षों से धूल फांक रही बंटवारे- नामांतरण की फाइलें, किसान बोले– “बिना कमीशन नहीं चलता काम”!
कलेक्टर संजय कुमार जैन ने समय-सीमा में राजस्व प्रकरण निपटाने के दिए निर्देश, लेकिन सवाल—जब 2 से 3 साल से लंबित मामलों का हिसाब ही नहीं, तो आदेशों का क्या असर?
मऊगंज। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में कलेक्टर संजय कुमार जैन ने राजस्व अधिकारियों को नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा, राजस्व वसूली, फार्मर रजिस्ट्री, ई-केवाईसी, समग्र आईडी, एनएफएसए और प्रधानमंत्री राहत योजना सहित लंबित प्रकरणों का समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी निराकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राजस्व विभाग का काम सीधे आम जनता से जुड़ा है, इसलिए किसी भी प्रकरण को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जाए।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल समीक्षा बैठकों से व्यवस्था बदल जाएगी? जिले में ऐसे अनेक किसान हैं जो दो-दो, तीन-तीन वर्षों से बंटवारा, नामांतरण और सीमांकन के लिए तहसीलों के चक्कर काट रहे हैं। आरोप हैं कि कई फाइलें अलमारियों और दराजों में धूल खा रही हैं, जबकि फरियादी न्याय की उम्मीद में भटक रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि जब तक “कमीशन” नहीं दिया जाता, तब तक फाइल आगे नहीं बढ़ती। ऐसे में हर समीक्षा बैठक में सख्त निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन धरातल पर हालात जस के तस बने रहते हैं। यदि अधिकारियों से लंबित मामलों की वास्तविक संख्या पूछी जाए तो कई बार स्पष्ट जवाब तक नहीं मिल पाता।
कलेक्टर ने 0–3 माह, 3–6 माह, 6 माह–1 वर्ष तथा समय-सीमा से अधिक लंबित प्रकरणों की तहसीलवार समीक्षा कर विशेष अभियान चलाकर निराकरण के निर्देश दिए। साथ ही रास्ता विवादों के निष्पक्ष समाधान, राजस्व वसूली, ई-ऑफिस प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन और जर्जर भवनों के सर्वेक्षण पर भी जोर दिया।




