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Rewa MP: प्रभार के पदों में बैठे अधिकारी कर रहे भ्रष्टाचार नकली अधिकारियों पर मेहरबान स्वास्थ्य विभाग

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🕒 Updated: 19 Aug 2026, 05:03 PM

रीवा NHM के DPM के विरुद्ध वर्ष 2016 में हुई की जांच से लेकर करोड़ों के वित्तीय प्रस्ताव पर उठे सवाल।

प्रभार के पदों में बैठे अधिकारी कर रहे भ्रष्टाचार नकली अधिकारियों पर मेहरबान स्वास्थ्य विभाग

विराट वसुंधरा
रीवा। जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में लंबे समय से कई अधिकारी प्रभार के पदों में काम कर रहे हैं ऐसे अधिकारी इतने प्रभावशाली हैं कि मूल पदों पर न रहते हुए मलाईदार प्रभार के पदों में अधिक रुचि रखते हैं ऐसा नहीं है कि पद रिक्त है बल्कि जानबूझकर ऐसे पद रिक्त रखे जाते हैं जिससे भ्रष्टाचार को अंजाम देने वाले भ्रष्ट अधिकारी पद हथियाकर लाखों करोड़ों का घोटाला कर सके सूत्र बताते हैं कि रीवा जिले में डीपीएम का पद लंबे समय से नियमित पदस्थापना पर नहीं भरा गया इसके पीछे का कारण एनएचएम से आने वाली करोड़ों की राशि में हेरा फेरी करने की मंशा है राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, जिला रीवा में जिला कार्यक्रम प्रबंधक प्रभारी के रूप में कार्यरत राघवेन्द्र मिश्रा की कार्यप्रणाली को लेकर अब अभिलेखीय जांच की मांग उठी है। पूर्व में विस्तृत शिकायत में वर्ष 2016 में तत्कालीन कलेक्टर स्तर पर हुई कथित जांच, तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा प्रस्तावित विभागीय कार्रवाई तथा वर्तमान में उनके स्तर से संचालित वित्तीय एवं प्रशासनिक गतिविधियों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की गई है।
समाजसेवी अशोक कुमार मिश्रा शिकायतकर्ता ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति को पूर्वाग्रहपूर्वक दोषी ठहराना नहीं, बल्कि मूल सरकारी अभिलेखों के आधार पर वास्तविक स्थिति सामने लाना है। आवेदन में वर्ष 2016 के प्रकरण क्रमांक /NHM/20216/3444, रीवा, दिनांक 22 दिसंबर 2016 की मूल नस्ती तलब कर जांच रिपोर्ट, निष्कर्ष, पत्राचार और तत्कालीन CMHO द्वारा की गई अथवा प्रस्तावित कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया गया है।
2016 की जांच में क्या हुआ था?
शिकायत में दावा किया गया है कि वर्ष 2016 में तत्कालीन कलेक्टर, रीवा द्वारा राघवेन्द्र मिश्रा से संबंधित एक मामले की जांच कराई गई थी और इसके बाद तत्कालीन CMHO द्वारा सेवा संबंधी कठोर कार्रवाई/टर्मिनेशन का प्रस्ताव किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि शिकायतकर्ता स्वयं इस जांच या प्रस्ताव की प्रमाणित प्रति उपलब्ध होने का दावा नहीं करता। इसीलिए मांग की गई है कि संबंधित मूल नस्ती शासन स्तर से तलब कर यह स्पष्ट किया जाए कि जांच किस विषय पर हुई थी, जांच में क्या निष्कर्ष निकले, कार्रवाई का प्रस्ताव किस आधार पर बनाया गया और सक्षम प्राधिकारी ने उस पर क्या निर्णय लिया।
वर्तमान पदस्थापना की भी हो समीक्षा
शिकायत में यह भी सवाल उठाया गया है कि यदि वर्ष 2016 की जांच या उससे संबंधित कोई प्रतिकूल तथ्य विभागीय अभिलेखों में मौजूद था, तो वर्तमान DPM पद पर पदस्थापना के समय उसका सक्षम स्तर पर परीक्षण किया गया था या नहीं। इस संबंध में संबंधित सेवा अभिलेखों एवं पदस्थापना से जुड़े दस्तावेजों की अभिलेखीय समीक्षा कराने की मांग की गई है।
2024-25 और 2025-26 के वित्तीय मामलों की स्वतंत्र जांच की मांग।
मामले में वर्तमान वित्तीय दायित्वों को देखते हुए वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 में DPM स्तर से अनुमोदित, अनुशंसित, अग्रेषित अथवा प्रक्रिया में शामिल प्रमुख वित्तीय प्रस्तावों एवं भुगतानों की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। जांच में वित्तीय प्रस्ताव, स्वीकृति आदेश, भुगतान स्वीकृतियां, बिल-वाउचर, नोटशीट, सक्षम अधिकारी की स्वीकृति, उपयोगिता प्रमाण-पत्र, व्यय प्रतिवेदन तथा भुगतान से जुड़े अभिलेखों की जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने कहा है कि किसी भुगतान को पहले से अनियमित मानने के बजाय प्रस्ताव से भुगतान तक पूरी प्रक्रिया और प्रत्येक अधिकारी की भूमिका का अभिलेखों के आधार पर निर्धारण किया जाए।
ATP बनी जांच का अहम केंद्र
आवेदन में Annual Training Plan (ATP) को विशेष जांच का विषय बनाने की मांग की गई है। वर्ष 2024-25 और 2025-26 में स्वीकृत प्रशिक्षणों की संख्या, बजट, प्रशिक्षण प्रस्ताव, प्रतिभागियों की सूची, वास्तविक उपस्थिति, प्रशिक्षक एवं संसाधन व्यक्ति को भुगतान, भोजन-नाश्ता, आवास, यात्रा, प्रशिक्षण सामग्री, स्थल किराया तथा अन्य खर्चों के दस्तावेजों की जांच की मांग की गई है। इसके साथ ही स्वीकृत ATP और वास्तव में आयोजित प्रशिक्षणों का तुलनात्मक परीक्षण करने को कहा गया है, ताकि यह सामने आ सके कि कितने प्रशिक्षण स्वीकृत थे, कितने आयोजित हुए, कितने पर भुगतान हुआ और स्वीकृत बजट की तुलना में वास्तविक खर्च कितना रहा।
DPM की वित्तीय शक्तियों की भी होगी पड़ताल?
शिकायत में DPM को प्राप्त वित्तीय एवं प्रशासनिक शक्तियों के मूल प्रत्यायोजन आदेश की समीक्षा की मांग की गई है। इसमें संबंधित शासनादेश, NHM के वित्तीय दिशा-निर्देश, वित्तीय सीमा और अनुमोदन-अनुशंसा की अधिकारिता का परीक्षण करने का अनुरोध किया गया है। इसके बाद वर्ष 2024-25 और 2025-26 में लिए गए प्रमुख वित्तीय एवं प्रशासनिक निर्णयों का संबंधित प्रत्यायोजित शक्तियों से मिलान करने की मांग की गई है।
आउटसोर्स कर्मचारियों के भुगतान पर भी नजर
आवेदन में आउटसोर्स एजेंसियों को किए गए भुगतान की विशेष जांच की मांग की गई है। इसमें अनुबंध, निविदा, कार्यादेश, स्वीकृत दर, कर्मचारीवार उपस्थिति, बिल, भुगतान, EPF/ESI, कर्मचारीवार मानदेय और विभागीय सत्यापन जैसे दस्तावेजों का परीक्षण प्रस्तावित है।
स्वतंत्र जांच दल की मांग
शिकायतकर्ता ने जांच उसी प्रशासनिक श्रृंखला के अधिकारी से कराने के बजाय क्षेत्रीय स्तर पर स्वतंत्र जांच दल गठित करने की मांग की है। जांच दल में वित्तीय/लेखा, प्रशासनिक और NHM कार्यक्रमों के जानकार अधिकारियों को शामिल करने का अनुरोध किया गया है। जांच दल को वर्ष 2016 की मूल नस्ती से लेकर वर्तमान वित्तीय प्रस्ताव, ATP, प्रशिक्षण दस्तावेज, भुगतान अभिलेख, प्रत्यायोजन आदेश और आउटसोर्स भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की बिंदुवार जांच कर समयबद्ध रिपोर्ट देने की मांग की गई है।
जांच अवधि में अंतरिम व्यवस्था की मांग
शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि जांच अधिकारी को प्रथमदृष्टया लगे कि वर्तमान वित्तीय एवं प्रशासनिक दायित्व जांच की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकते हैं, तो जांच अवधि में संवेदनशील वित्तीय/प्रशासनिक दायित्वों से पृथक रखने जैसी अंतरिम प्रशासनिक व्यवस्था पर विचार किया जाए। साथ ही वर्ष 2016 की जांच और वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 के वित्तीय, प्रशिक्षण एवं आउटसोर्स भुगतान से जुड़े मूल दस्तावेजों तथा डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने के निर्देश जारी करने की मांग भी की गई है।
निष्पक्ष जांच के बाद होगी स्थिति स्पष्ट।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस शिकायत पर क्या संज्ञान लेता है और क्या वर्ष 2016 की कथित जांच से लेकर वर्तमान वित्तीय एवं प्रशासनिक कार्यप्रणाली तक स्वतंत्र अभिलेखीय जांच के आदेश जारी किए जाते हैं। यदि जांच होती है तो उसके निष्कर्ष ही यह तय करेंगे कि लगाए गए आरोपों में कितनी वास्तविकता है और कहीं कोई वित्तीय अथवा प्रशासनिक अनियमितता हुई है या नहीं। प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्थिति स्पष्ट होगी कि प्रभारी डीपीएम द्वारा पद में रहते क्या गुल खिलाए गए हैं।

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