🕒 Updated: 11 Aug 2026, 02:43 AM
Mauganj MP:खटखरी हादसे की कवरेज पर थाना प्रभारी की कथित दबंगई: पत्रकारों को रोका, FIR की धमकी का आरोप; बोले- “मेरी नजर में एक बार चढ़ गया तो उतरता नहीं!
मऊगंज ।जिले के खटखरी बाजार में सड़क हादसे के बाद न्याय की मांग को लेकर ग्रामीणों द्वारा किए गए हाईवे जाम की कवरेज करना पत्रकारों को भारी पड़ गया। पत्रकारों ने मऊगंज थाना प्रभारी राम सिंह पर कवरेज में बाधा डालने, अभद्र व्यवहार करने और मुकदमा दर्ज करने की धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। नाराज पत्रकार सोमवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शशिकांत सरयाम को लिखित ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की।
हादसे की खबर दिखाना क्या अपराध है?
पत्रकारों के अनुसार, रविवार रात खटखरी बाजार में हुए दर्दनाक सड़क हादसे में एक युवती की मौत के बाद परिजन और ग्रामीण आक्रोशित थे। न्याय की मांग को लेकर हाईवे पर जाम लगाया गया था। मौके पर तनावपूर्ण स्थिति और बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बीच पत्रकार प्रद्युम्न शुक्ला, अमर मिश्रा, सुनील पांडे, विनोद सिंह और दीपक सिंह घटना की वीडियो कवरेज कर रहे थे।
आरोप है कि इसी दौरान थाना प्रभारी राम सिंह ने पत्रकारों को कवरेज करने से रोकने का प्रयास किया और वहां से हटने का दबाव बनाया। पत्रकारों का दावा है कि विरोध करने पर थाना प्रभारी ने कथित तौर पर धमकी देते हुए कहा- “मेरी नजर में एक बार चढ़ गया तो उतरता नहीं, FIR जरूर करूंगा।”
पत्रकारों का कहना है कि वे न तो पुलिस की कार्रवाई में बाधा डाल रहे थे और न ही कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का प्रयास कर रहे थे। वे सिर्फ घटनास्थल की स्थिति, ग्रामीणों के विरोध और सड़क हादसे से जुड़ी वास्तविक तस्वीर कैमरे में रिकॉर्ड कर रहे थे।
पत्रकारों ने कहा- दबाव में नहीं झुकेंगे
पत्रकारों का कहना है कि लोकतंत्र में पत्रकार की भूमिका घटनास्थल की सच्चाई जनता तक पहुंचाने की है। यदि किसी सड़क हादसे, विरोध प्रदर्शन या प्रशासनिक कार्रवाई की कवरेज के दौरान पत्रकारों को पुलिस की ओर से कथित धमकी दी जाएगी, तो यह न केवल पत्रकारिता की स्वतंत्रता बल्कि आम जनता के सूचना के अधिकार से भी जुड़ा गंभीर सवाल है।
पत्रकारों ने ज्ञापन में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर थाना प्रभारी के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है। साथ ही कहा है कि तीन दिवस के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों की कवरेज के दौरान पत्रकार हाथों पर काली पट्टी बांधकर पुलिस के खिलाफ सांकेतिक विरोध दर्ज कराएंगे।





