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Mauganj MP:मऊगंज थाना प्रभारी रामसिंह निकले ‘अहिरावण’! भरोसे में लेकर समझौता, फिर पुराने मामले में केस दर्ज करने का आरोप!

By: संवाददाता । विराट वसुंधरा

On: Wednesday, September 30, 2026 3:26 AM

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🕒 Updated: 30 Sep 2026, 03:26 AM

Mauganj MP:मऊगंज थाना प्रभारी रामसिंह निकले ‘अहिरावण’! भरोसे में लेकर समझौता, फिर पुराने मामले में केस दर्ज करने का आरोप!

 

 

मऊगंज। मऊगंज थाना प्रभारी रामसिंह पटेल की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आरोप है कि एक पत्रकार को पहले भरोसे में लिया गया, समझौते की बात हुई और इसके बाद पुराने मामले को आधार बनाकर उसके खिलाफ प्रकरण दर्ज कर दिया गया। घटनाक्रम ने अब केवल थाना प्रभारी की भूमिका ही नहीं, बल्कि पुलिस तंत्र की कार्यशैली और निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि मामला पुराना था तो उस पर कार्रवाई की परिस्थितियां क्या थीं? क्या पहले समझौते की पहल की गई थी? यदि हां, तो उसके बाद उसी मामले में प्रकरण दर्ज करने की आवश्यकता क्यों पड़ी? इन सवालों का जवाब पुलिस की ओर से स्पष्ट रूप से सामने आना चाहिए।
किसी भी व्यक्ति को पुराने मामले में गलत तरीके से फंसाया जाना गंभीर आरोप है। हालांकि, इस मामले में लगे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बिना किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह कानून की प्रक्रिया और पुलिस की निष्पक्षता से जुड़ा गंभीर विषय बन सकता है।

 

 

‘अंगूठी का नगीना’ होने की चर्चा, लेकिन जवाबदेही किसकी?

मऊगंज में चर्चाएं यह भी हैं कि थाना प्रभारी रामसिंह पटेल की स्थानीय विधायक प्रदीप पटेल और पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र कुमार जैन से नजदीकी है और वे उनके ‘अंगूठी के नगीने’ की तरह काम कर रहे हैं। हालांकि, इस कथित राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
लेकिन यदि पुलिस की कार्यशैली को लेकर ऐसे सवाल लगातार उठ रहे हैं, तो जवाबदेही का सवाल सीधे पुलिस अधीक्षक तक पहुंचता है। आखिर थाने में क्या कार्रवाई हो रही है, किन शिकायतों पर प्रकरण दर्ज किए जा रहे हैं और किन परिस्थितियों में पुलिस कार्रवाई कर रही है—इसकी निगरानी और जवाबदेही किसकी है?

 

 

पत्रकार की कलम सवाल पूछती रहेगी

मामला अब केवल एक प्रकरण तक सीमित नहीं रह गया है। यह पुलिस और पत्रकारिता के बीच भरोसे, निष्पक्ष जांच और कानून के समान इस्तेमाल का सवाल बनता जा रहा है।
पत्रकार के खिलाफ यदि कोई ठोस साक्ष्य हैं, तो पुलिस को उन्हें सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना चाहिए और यदि कार्रवाई में कोई अनियमितता हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
क्योंकि सवाल पूछने वाली कलम को दबाने से सवाल खत्म नहीं होते—बल्कि जवाबदेही की मांग और मजबूत होती है।
अब देखना यह होगा कि मऊगंज पुलिस इन सवालों का जवाब देती है या फिर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए उच्चस्तरीय हस्तक्षेप का इंतजार किया जाता है।

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