Mauganj MP:मऊगंज पूर्व विधायक के कथित ऑडियो वायरल मामले ने पकड़ा तूल, थाने पहुंची शिकायत!
युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने FIR की मांग उठाई, ऑडियो के स्रोत से लेकर प्रसारण तक जांच की मांग
मऊगंज। मऊगंज के पूर्व विधायक एवं मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश महासचिव सुखेंद्र सिंह बन्ना की कथित निजी बातचीत का ऑडियो प्रसारित होने का मामला अब पुलिस थाने तक पहुंच गया है। कथित ऑडियो को लेकर राजनीतिक और स्थानीय स्तर पर चल रही चर्चाओं के बीच युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष आशुतोष तिवारी ने 10 अक्टूबर को मऊगंज थाना प्रभारी को लिखित आवेदन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच और संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है।
शिकायत के बाद मामला अब सिर्फ राजनीतिक चर्चाओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस जांच के दायरे में पहुंच गया है। आवेदन में राजू सिंह बेलौही, विनोद मिश्रा खोड़ामानी सहित अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच कराने की मांग की गई है।
ऑडियो कहां से आया और किसने आगे बढ़ाया?
युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष के आवेदन में कथित ऑडियो के मूल स्रोत का पता लगाने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता के अनुसार ऑडियो अलग-अलग लोगों तक पहुंचा, जिसमें मऊगंज जिला कांग्रेस अध्यक्ष शेख मुख्तार के मोबाइल फोन तथा रीवा-मऊगंज क्षेत्र के कुछ पत्रकारों तक इसके पहुंचने का भी उल्लेख किया गया है।
अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर यह ऑडियो मूल रूप से किसके पास था, किस माध्यम से बाहर आया और इसे आगे किन-किन लोगों ने प्रसारित किया।
मूल रिकॉर्डिंग और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने पुलिस से केवल ऑडियो के प्रसारण की जांच करने की मांग नहीं की है, बल्कि उसके डिजिटल स्रोत और प्रमाणिकता की भी जांच की मांग रखी है।
आवेदन में मूल ऑडियो रिकॉर्डिंग, मोबाइल फोन में मौजूद संदेशों तथा अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर यह पता लगाने की मांग की गई है कि कथित ऑडियो में किसी प्रकार की छेड़छाड़, एडिटिंग या अन्य डिजिटल बदलाव तो नहीं किया गया।
यदि जांच में ऑडियो के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ सामने आती है तो यह मामला और गंभीर हो सकता है। वहीं, यदि रिकॉर्डिंग वास्तविक पाई जाती है तो उसके स्रोत और प्रसारण से जुड़े तथ्यों की जांच भी अहम होगी।
‘निर्दोष को आरोपी बनाने का उद्देश्य नहीं’—शिकायतकर्ता
युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने अपने आवेदन में यह भी स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य किसी निर्दोष व्यक्ति को अनावश्यक रूप से आरोपी बनाना नहीं है। उनकी मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक तथ्यों और जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान की जाए।
शिकायत में नियमानुसार FIR दर्ज कर विवेचना शुरू करने तथा जांच के दौरान यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग की गई है।
नवागत थाना प्रभारी ने दिया कार्रवाई का भरोसा
मामला थाने पहुंचने के बाद मऊगंज के नवागत थाना प्रभारी ने विधिसम्मत कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब निगाह पुलिस की जांच पर टिकी है कि कथित ऑडियो की सत्यता, उसके मूल स्रोत और प्रसारण से जुड़े लोगों की भूमिका को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं।
फिलहाल पुलिस की जांच पूरी होने से पहले ऑडियो में कही गई बातों अथवा किसी व्यक्ति की भूमिका को प्रमाणित तथ्य मानना उचित नहीं होगा। वास्तविक स्थिति जांच और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
अब सवाल सिर्फ ऑडियो के वायरल होने का नहीं है—सवाल यह भी है कि ऑडियो की शुरुआत कहां से हुई, इसे किसने बाहर निकाला और किसने इसे आगे प्रसारित किया? इन सवालों के जवाब पुलिस जांच से सामने आने की उम्मीद है।





