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Mauganj MP:शासकीय रिकॉर्ड लीक मामले में कार्रवाई की मांग तेज, प्रेस एसोसिएशन उतरेगा मैदान में!

By: संवाददाता । विराट वसुंधरा

On: Wednesday, October 28, 2026 9:53 AM

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🕒 Updated: 28 Oct 2026, 09:53 AM

Mauganj MP:शासकीय रिकॉर्ड लीक मामले में कार्रवाई की मांग तेज, प्रेस एसोसिएशन उतरेगा मैदान में!

 

 

 

कलेक्टर को साक्ष्यों के साथ शिकायत के बाद भी एक सप्ताह में ठोस कार्रवाई नहीं होने का दावा, पत्रकारों ने सामूहिक पहल की चेतावनी दी

मऊगंज। शासकीय रिकॉर्ड के कथित तौर पर कार्यालय से बाहर जाने के मामले में कार्रवाई की मांग अब तेज होती नजर आ रही है। मामले को लेकर पत्रकारों ने मऊगंज कलेक्टर राजेश कुमार ओगरे को कथित साक्ष्यों के साथ शिकायत सौंपते हुए जांच और संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की थी। शिकायत के करीब एक सप्ताह बाद भी कोई ठोस कार्रवाई सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आने पर पत्रकारों में नाराजगी बढ़ रही है।

 

 

 

मामले में कलेक्टर कार्यालय के स्टेनो सर्वसुख सिंह पटेल की भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों और तथ्यों की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि शासकीय रिकॉर्ड कार्यालय की निर्धारित प्रक्रिया से बाहर कैसे पहुंचा और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है।

 

 

 

प्रेस एसोसिएशन सौंपेगा सामूहिक ज्ञापन

मामले को लेकर अब प्रेस एसोसिएशन ने सामूहिक रूप से कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया है। एसोसिएशन का कहना है कि शासकीय दस्तावेजों की गोपनीयता, रिकॉर्ड की सुरक्षा और कार्यालयीन प्रक्रिया से जुड़ा विषय केवल किसी एक व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा सवाल है।

पत्रकारों का कहना है कि शिकायत में उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों की जांच कर तथ्य सामने लाए जाने चाहिए और यदि जांच में किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन या अनधिकृत तरीके से रिकॉर्ड साझा किए जाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

 

 

 

कार्रवाई नहीं हुई तो आगे की रणनीति पर फैसला

प्रेस एसोसिएशन ने संकेत दिया है कि सामूहिक ज्ञापन के बाद भी यदि मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं होती है, तो पत्रकारों की बैठक बुलाकर अगली रणनीति तय की जाएगी। जरूरत पड़ने पर मामले को उच्च अधिकारियों के समक्ष उठाने और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलनात्मक पहल करने पर भी विचार किया जा सकता है।

 

 

 

अब सवाल यह है कि शासकीय रिकॉर्ड के कथित लीक होने की शिकायत पर जिला प्रशासन जांच कब शुरू करता है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं? फिलहाल निगाहें कलेक्टर कार्यालय की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।

उपरोक्त मामले में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ताओं द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना शेष है। संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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