MP news:शराब तस्करी रोकने निकले टीआई दिलीप पुरी की मौत, MP में शराब माफिया पर फिर उठे बड़े सवाल!
देवास/खातेगांव। मध्यप्रदेश में अवैध शराब के कारोबार पर अंकुश लगाने के दावों के बीच देवास जिले के खातेगांव से सामने आई घटना ने कानून-व्यवस्था और शराब तस्करी के नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अवैध शराब तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के दौरान थाना प्रभारी दिलीप पुरी की जान चली गई। खबरों के मुताबिक, संदिग्ध शराब से भरे वाहन को रोकने की कार्रवाई के दौरान वे ट्रक की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हुए, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।
यह सिर्फ एक पुलिस अधिकारी की मौत का मामला नहीं है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि आखिर प्रदेश में अवैध शराब का कारोबार कितना मजबूत हो चुका है कि उसे रोकने की कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मियों की जान तक जोखिम में पड़ रही है?
शराब तस्करी के नेटवर्क पर कब होगी बड़ी कार्रवाई?
मध्यप्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से समय-समय पर अवैध पैकारी, बिना नंबर या संदिग्ध वाहनों से शराब परिवहन और गांव-गांव तक शराब पहुंचाए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। कार्रवाई के दौरान अक्सर छोटे स्तर के आरोपियों तक पुलिस पहुंचती है, लेकिन बड़ा सवाल यही रहता है कि इस पूरे नेटवर्क को संचालित करने वाले असली चेहरे आखिर कौन हैं?
खातेगांव की घटना के बाद अब निगाहें इस बात पर हैं कि जांच केवल घटना तक सीमित रहती है या शराब तस्करी के पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने की कोशिश होती है।
पुलिस अधिकारी की मौत ने व्यवस्था पर खड़े किए सवाल
एक ओर पुलिस लगातार अवैध शराब के खिलाफ अभियान चलाने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर ऐसी घटनाएं बताती हैं कि शराब तस्करी का कारोबार पूरी तरह खत्म करने की चुनौती अभी भी बड़ी है।
सवाल यह भी है कि संदिग्ध शराब परिवहन करने वाले वाहनों की निगरानी, तस्करी के मार्गों की पहचान और शराब के अवैध नेटवर्क से जुड़े लोगों पर कार्रवाई के लिए क्या पर्याप्त और प्रभावी व्यवस्था है?
मुख्यमंत्री से जनता के सीधे सवाल
थाना प्रभारी दिलीप पुरी की मौत के बाद प्रदेश सरकार और प्रशासन के सामने कई सवाल खड़े हैं—
क्या मध्यप्रदेश में शराब के अवैध कारोबार पर निर्णायक प्रहार होगा?
शराब तस्करी के पीछे सक्रिय पूरे नेटवर्क की जांच कब होगी?
क्या कार्रवाई सिर्फ वाहन चालक या छोटे आरोपियों तक सीमित रहेगी, या नेटवर्क के बड़े नामों तक भी पहुंचेगी?
पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के लिए ऐसे अभियानों में क्या ठोस व्यवस्था की जाएगी?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रदेश में अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी अंकुश कब लगेगा। एक पुलिस अधिकारी की जान चली गई है—अब जरूरत केवल कार्रवाई की घोषणा की नहीं, बल्कि शराब तस्करी के पूरे तंत्र को चिन्हित कर उसके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने की है।
दिलीप पुरी की मौत उन तमाम सवालों को फिर सामने ले आई है, जिनका जवाब प्रदेश की जनता लंबे समय से चाहती है।





