Rewa MP:सस्ती शराब की बिक्री पर सवाल: आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल, उपायुक्त ने दिए सख्ती के निर्देश!
रीवा। सागर और देवास में कथित तौर पर जहरीली अथवा अवैध शराब से जुड़ी घटनाओं के बाद शराब की बिक्री और उसकी गुणवत्ता को लेकर प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। रीवा जिले में भी कथित तौर पर निर्धारित न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) से कम दर पर शराब बिकने की शिकायतों ने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
आरोप है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में जिले की कुछ शराब दुकानों पर शराब की बिक्री निर्धारित दरों से कम में किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। यदि ऐसा हो रहा है तो सवाल यह है कि इसकी निगरानी की जिम्मेदारी संभालने वाला आबकारी अमला आखिर कहां है?
सस्ती शराब की बिक्री से बढ़ सकता है जोखिम
जानकारों के मुताबिक शराब अत्यधिक सस्ती मिलने पर सेवन की मात्रा बढ़ने की आशंका रहती है। चिकित्सकीय दृष्टि से अत्यधिक शराब का सेवन लंबे समय में लीवर, किडनी और अन्य अंगों पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। ऐसे में शराब की बिक्री, गुणवत्ता और निर्धारित मूल्य पर आबकारी विभाग की प्रभावी निगरानी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
हालांकि, रीवा में सस्ती शराब की बिक्री से सीधे तौर पर किसी विशेष स्वास्थ्य घटना का कारण स्थापित नहीं हुआ है, लेकिन शिकायतों और सामने आए आरोपों की स्वतंत्र जांच जरूरी मानी जा रही है। यही वजह है कि आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
जिला आबकारी अधिकारी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल
मामले में जिला आबकारी अधिकारी की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप लगाने वालों का कहना है कि जिले में शराब दुकानों पर नियमों के उल्लंघन की शिकायतों के बावजूद अपेक्षित सख्ती दिखाई नहीं देती।
अधिकारी के खिलाफ पूर्व में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) में प्रकरण दर्ज होने का भी उल्लेख किया जा रहा है। हालांकि, किसी भी आरोप अथवा प्रकरण को अंतिम निष्कर्ष मानने के बजाय उसका न्यायिक एवं आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर सत्यापन आवश्यक है।
इसी तरह कुछ माह पूर्व गुढ़ समूह के शराब ठेकेदार को नोटिस दिए जाने को लेकर भी विभागीय कार्रवाई की चर्चा रही है। इन तमाम घटनाक्रमों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिले में शराब कारोबार की निगरानी कितनी प्रभावी है?
उपायुक्त ने ली बैठक, सस्ती शराब पर कार्रवाई के निर्देश
रीवा संभाग में स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आबकारी संभागीय उड़नदस्ता उपायुक्त माधू सिंह ने डीसी कार्यालय में जिला आबकारी अधिकारी सहित विभागीय अमले की बैठक ली। बैठक में कथित रूप से कम कीमत पर शराब बिक्री वाले स्थानों पर कार्रवाई करने, यूपी सीमा पर निगरानी बढ़ाने और अवैध पैकारों के खिलाफ सख्ती के निर्देश दिए गए।
इसके साथ ही शराब उपभोक्ताओं को असली और नकली शराब के बीच अंतर तथा अवैध स्रोतों से शराब नहीं खरीदने के संबंध में जागरूक करने पर भी जोर दिया गया।
एक दिन दिखा असर, 7 दुकानों पर विभागीय प्रकरण
बैठक के बाद आबकारी विभाग की संभागीय टीम और जिला आबकारी अमले ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान 7 शराब दुकानों के विरुद्ध विभागीय प्रकरण बनाए गए, जबकि 6 न्यायालयीन प्रकरण दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।इसके अलावा कुछ होटल और रिसॉर्ट की भी जांच की गई।कार्रवाई के बाद अब बड़ा सवाल यह है कि क्या यह अभियान नियमित निगरानी में बदलेगा या फिर केवल एक-दो दिन की कार्रवाई तक सीमित रह जाएगा?
यूपी सीमा और पैकारों पर निगरानी बनी चुनौती
रीवा जिले की उत्तर प्रदेश सीमा से जुड़ाव के कारण शराब के अवैध परिवहन और बिक्री पर निगरानी की चुनौती बनी रहती है। ऐसे में सीमा क्षेत्रों में चेकिंग, शराब दुकानों की नियमित जांच और पैकारों के खिलाफ कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण है।
आबकारी विभाग के सामने अब केवल कार्रवाई दिखाने की नहीं, बल्कि यह साबित करने की चुनौती है कि जिले में शराब की बिक्री निर्धारित नियमों, कीमत और गुणवत्ता के अनुरूप हो रही है।
सबसे बड़ा सवाल—क्या सस्ती शराब पर स्थायी रोक लगेगी?
उपायुक्त की बैठक और उसके बाद हुई कार्रवाई से यह संकेत जरूर मिला है कि विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है। लेकिन असली परीक्षा आने वाले दिनों में होगी।
यदि एमएसपी से कम कीमत पर शराब बिक्री की शिकायतें सही पाई जाती हैं तो जिम्मेदार दुकानदारों के खिलाफ लगातार कार्रवाई क्यों नहीं होती? क्या शराब दुकानों की नियमित निगरानी के लिए कोई प्रभावी तंत्र मौजूद है? और क्या सागर-देवास जैसी घटनाओं की आशंका को देखते हुए रीवा में पहले से ही पर्याप्त सतर्कता बरती जा रही है?
इन सवालों के जवाब आबकारी विभाग की आगामी कार्रवाई और जांच के परिणाम से ही स्पष्ट होंगे।





