JBP MP:जमानती वारंट के बाद भी हाईकोर्ट में पेश नहीं हुए स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव, कोर्ट ने दिया आखिरी मौका!
दो सप्ताह में आदेश का पालन करने की मोहलत, 17 नवंबर को कमिश्नर और छिंदवाड़ा DEO को व्यक्तिगत उपस्थिति के निर्देश की चेतावनी
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आदेश की अवहेलना से जुड़े एक अवमानना मामले में सख्त रुख अपनाते हुए स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. संजय गोयल को एक और मौका दिया है। खास बात यह है कि इससे पहले हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव समेत तीन अधिकारियों के खिलाफ पांच-पांच हजार रुपये के जमानती वारंट जारी किए थे, इसके बावजूद शुक्रवार को प्रमुख सचिव अदालत में उपस्थित नहीं हुए।
मामले की सुनवाई जस्टिस दीपक खोत की एकलपीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि पूर्व आदेश का पालन करने के लिए कुछ और समय की आवश्यकता है। इस पर कोर्ट ने दो सप्ताह की मोहलत प्रदान करते हुए स्पष्ट किया कि अब निर्धारित समय के भीतर आदेश का पालन सुनिश्चित किया जाए।
17 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 नवंबर की तारीख निर्धारित की है। अदालत ने चेतावनी दी है कि यदि इस अवधि में पूर्व आदेश का पालन नहीं किया गया तो अगली सुनवाई में कोष एवं लेखा विभाग के कमिश्नर भास्कर लक्षाकर और छिंदवाड़ा के जिला शिक्षा अधिकारी गोपाल सिंह बघेल को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना पड़ सकता है।
इस आदेश के बाद अब संबंधित विभाग के अधिकारियों पर पूर्व न्यायिक आदेश के अनुपालन को लेकर दबाव बढ़ गया है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला छिंदवाड़ा की सेवानिवृत्त सहायक शिक्षिका सुषमा गादरे द्वारा दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में यह मुद्दा उठाया गया है कि हाईकोर्ट द्वारा 23 सितंबर 2024 को पारित आदेश के बावजूद उनसे वेतन की वसूली की कार्रवाई की जा रही है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि अदालत के पूर्व आदेश के बावजूद संबंधित स्तर पर उसका पालन नहीं हुआ और वेतन वसूली की कार्रवाई जारी रही। इसी को लेकर हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई।
14 अक्टूबर को जारी हुए थे जमानती वारंट
मामले में हाईकोर्ट ने इससे पहले 14 अक्टूबर को स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. संजय गोयल सहित तीन अधिकारियों के खिलाफ पांच-पांच हजार रुपये के जमानती वारंट जारी किए थे।
इसके बाद भी शुक्रवार की सुनवाई में प्रमुख सचिव की व्यक्तिगत उपस्थिति नहीं हुई। हालांकि अदालत ने फिलहाल एक और अवसर देते हुए राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर पूर्व आदेश का पालन सुनिश्चित करने का समय दिया है।
अब आदेश के पालन पर टिकी नजर
हाईकोर्ट की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी। अब देखना महत्वपूर्ण होगा कि दो सप्ताह की दी गई मोहलत में संबंधित विभाग पूर्व आदेश का पालन करता है या नहीं। कोर्ट के निर्देश के मुताबिक यदि आदेश का अनुपालन नहीं हुआ तो अगली सुनवाई में कमिश्नर भास्कर लक्षाकर और छिंदवाड़ा DEO गोपाल सिंह बघेल की व्यक्तिगत उपस्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता गौतम प्रसाद ने पैरवी की।




