Rewa news:अधीक्षकों पर दबाव बनाकर फर्मों को कराया फर्जी भुगतान!

Rewa news:अधीक्षकों पर दबाव बनाकर फर्मों को कराया फर्जी भुगतान!
रीवा. आदिम जाति कल्याण विभाग में फर्जी रूप से बिलों का भुगतान कराने का मामला सामने आया है। मामले में कलेक्टर द्वारा कराई गई जांच में स्पष्ट हो गया है कि तत्कालीन जिला संयोजक एवं स्टोर प्रभारी ने मिलकर छात्रावासों के अधीक्षकों पर मौखिक रूप से अनाधिकृत तौर पर दबाव बनाया और उनसे लाखों रुपए का भुगतान अपने चहेते फर्मों को करा दिया। यह जांच सहायक कलेक्टर प्रपंज आर(आईएएस) एवं अपर कलेक्टर ने किया है। कलेक्टर के साथ ही जांच प्रतिवेदन संभागायुक्त को भी सौंपा है। यह शिकायत कुछ समय पहले कमल सिंह बघेल द्वारा की गई थी। इस पर कलेक्टर ने जांच टीम गठित की थी। सभी आरोपों की बिन्दुवार जांच कराई गई, जिसमें अधिकांश शिकायती बिंदु सही पाए गए। इसके चलते जांच प्रतिवेदन में तत्कालीन जिला संयोजक और स्टोर प्रभारी की भूमिका को सिविल सेवा आचरण नियम के विपरीत पाया गया और दोनों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।
शिकायत में कहा गया था कि हॉस्टलों में विद्युतीकरण कार्य के लिए बिना टेंडर के ही एक व्यक्ति को कार्यादेश सौंपकर करीब 67 लाख रुपए का भुगतान कराया गया। इस पर जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि 14 मार्च 2023 को 68.34 लाख रुपए का ई-भुगतान अधीक्षकों के खाते में गया। वहां नियमों का पालन नहीं करते हुए बिना टेंडर के ही भुगतान ठेकेदार को करा दिया गया। जबकि कलेक्टर ने भी निर्देशित किया था कि आरईएस के अधिकारियों की निगरानी में टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाए। जिला संयोजक ने बिजली फिटिंग कराने के कार्य का भुगतान करने का आदेश भी जारी किया था। 14 छात्रावासों के खाते में जीएसटी की राशि अब तक जमा है जबकि यह शासन के खाते में होना चाहिए। जड़कुड़ और बिछरहटा के छात्रावासों के पास किसी तरह के भुगतान के अभिलेख भी नहीं मिले हैं। ठेकेदारों को आरटीजीएस के माध्यम से भुगतान करना था लेकिन अधीक्षकों से चेक दिलवाए गए। एक अन्य शिकायती बिन्दु में आरोप था कि शिष्यवृत्ति की राशि आफलाइन भुगतान कराई गई। इस पर 46.64 लाख रुपए का भुगतान हुआ है। नस्ती के अवलोकन से पता चला है कि बिना सक्षम स्वीकृति प्राप्त किए ही राशि का आहरण किया गया है जो वित्तीय संहिता के मानक सिद्धांतों के विपरीत है। इसी तरह हास्टलों में बिजली मेंटेनेंस के नाम पर अधीक्षकों पर दबाव बनाकर एक निजी फर्म को भुगतान कराया गया।
आदिम जाति कल्याण विभाग के जिला संयोजक का पद लंबे समय से प्रभार पर चल रहा है। इस दौरान के मामले की शिकायत हुई है, उस समय संयुक्त कलेक्टर पीके पांडेय के पास प्रभार था। इस कारण अब पांडेय की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इसके पहले भी उन पर कई आरोप लगाए गए थे। साथ ही आरोप था कि स्टोर एवं निर्माण शाखा के प्रभारी विकास तिवारी को उनका संरक्षण है और वह छात्रावास अधीक्षकों पर उस बाबू के माध्यम से दबाव बनाते हैं।
अधीक्षकों ने कहा-जबरिया भुगतान कराया गया
जांच प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि गुढ़, चरैया, बालक पिपराही, खुटहा, हर्रई प्रताप सिंह के अधीक्षकों ने अपने कथन में बताया है कि सहायक ग्रेड तीन विकास तिवारी द्वारा जिला कार्यालय में बुलाकर चेक के माध्यम से जबरिया भुगतान कराया गया। उक्त बाबू लगातार जिला संयोजक के नाम पर दबाव बनाता था।