MP news: पुलिस ने मऊगंज का मामला क्लोज कर दिया लेकिन नफरत की दबी चिंगारी अभी भी खतरे की घंटी।

MP news: पुलिस ने मऊगंज का मामला क्लोज कर दिया लेकिन नफरत की दबी चिंगारी अभी भी खतरे की घंटी।
बीते 15 मार्च को मऊगंज के गडरा ग्राम में हुए दोहरे हत्याकांड की घटना को पुलिस ने एक तरह से क्लोज कर दिया है डीआईजी साकेत प्रकाश पांडेय और कमिश्नर रीवा संभाग बीएस जामोद के अनुसार इस घटना में शामिल सभी आरोपी पकड़ लिए गए हैं और उन्हें जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने अपना काम कर दिया है लेकिन इसके बाद भी वहां के हालत अभी सामान्य नहीं हुए हैं लगभग डेढ़ सौ की संख्या में चप्पे चप्पे पर पुलिस तैनात है जिसने अपराध किया वह सलाखों के पीछे पहुंच गया लेकिन इसी गांव के कई ऐसे निर्दोष आदिवासी और साकेत परिवार भी है जो इस घटना में शामिल नहीं थे लेकिन डर के कारण अपना घर छोड़कर भाग डर के मारे भाग गए ऐसे कई सवाल हैं जिनका ज़बाब हर कोई जानना चाहता है,
सवाल यह उठता है कि मेहनत मजदूरी करके अपना गुजर-बसर करने वाले आदिवासियों को भड़काया कौन। क्या स्थानीय राजनीति से लेकर विधानसभा स्तर तक की राजनीति अपने वोट बैंक के लिए नफरत के बीज बो रही थी।
तत्कालीन एसपी/ कलेक्टर और स्थानीय विधायक की अंदरूनी खींचातानी के बीच कहीं कोई गहरी साजिश तो नहीं हुई, कलेक्टर और एसपी का ट्रांसफर हुआ लेकिन घटना स्थल पर गैर जिम्मेदाराना फर्ज निभाने वाली एसडीओपी पर शासन प्रशासन की नजर क्यों नहीं पहुंची
छोटी छोटी घटनाओं में धरना और बड़ी घटनाओं में सड़क पर लाश रखकर राजनीति चमकाने वाले सत्ता और विपक्ष के नेता इस बड़ी घटना पर चुप क्यों है प्रभारी मंत्री के साथ विधायक गडरा मऊगंज पहुंचे लेकिन इससे पहले और बाद में क्यों नहीं पहुंचे।
इस बड़ी घटना के बाद स्थानीय विधायक की चुप्पी के मायने क्या हैं जबकि गडरा गांव में सन्नाटा पसरा है लोग अपना घर छोड़कर भाग गए हैं या फिर जेल में डाल दिए गए हैं गरीब आदिवासियों की खोज खबर लेने विधायक क्यों नहीं पहुंचे जबकि गांव का हर आदमी इस घटना से दुखी और परेशान है।
अवैध अतिक्रमण मंदिर और हिंदू मुसलमान जैसे मुद्दों पर विधायक की भूमिका कैसी होती है यह किसी से छिपा नहीं है लेकिन गडरा में हुई हृदय विदारक घटना के बाद उनकी निष्कृयता के मायने क्या हैं।
सनी द्विवेदी की हत्या होने के बाद मौके पर पहुचीं एसडीओपी कथित लेडी सिंघम द्वारा घटना की गंभीरता को क्यों नहीं समझा गया और तुरंत बिना तैयारी आरोपियों की गिरफ्तारी शुरू कर देती हैं।
सनी द्विवेदी की हत्या बदले की नियति से की गई लेकिन पुलिस एएसआई रामचरण गौतम की हत्या मौके पर मौजूद पुलिस लेडी सिंघम और तहसीलदार सहित जिम्मेदार अधिकारियों की दूरदर्शिता में कमी और लापरवाही का नतीजा है।
पकड़े गए कथित पत्रकार सहित अन्य आरोपियों की घटना से पहले और घटना होने के बाद तक किन-किन मोबाइल नंबरों से फोन पर बात हुई, जिन मोबाइल नंबरों से आरोपियों की बात हुई उन नंबरों की लोकेशन क्या थी इस दौरान कहीं कोई राजनीति का शातिर खिलाड़ी तो खेल नहीं कर रहा था।
इस तरह से कई अभी ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब का लोगों को इंतजार है गडरा गांव में अमन-चैन शांति कायम करने की जरूरत है जातिगत दुर्भावना और बदले की भावना से शुरू हुए इस घटनाक्रम पर पूर्ण रूप से पार पाने की आवश्यकता है।