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 कतर के गैस संयंत्रों पर मिसाइल हमले से दुनिया भर में एनर्जी संकट गहराया, LNG प्रोडक्शन में 17 परसेंट की कमी, भारत की गैस सप्लाई और इकॉनमी पर खतरा मंडरा रहा है

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🕒 Updated: 20 Mar 2026, 07:09 AM

 कतर के गैस संयंत्रों पर मिसाइल हमले से दुनिया भर में एनर्जी संकट गहराया, LNG प्रोडक्शन में 17 परसेंट की कमी, भारत की गैस सप्लाई और इकॉनमी पर खतरा मंडरा रहा है

NEW DELHI:    ईरान संकट (iran crisis) के बीच कतर के रास लफ्फान इंडस्ट्रियल शहर पर हुए भयानक मिसाइल हमलों (terrible missile attacks) ने दुनिया भर में एनर्जी सप्लाई चेन (Energy supply chains around the world) को हिलाकर रख दिया है। कतर एनर्जी के एक ऑफिशियल (An official from Qatar Energy) बयान के मुताबिक, 18 और 19 मार्च को हुए इन हमलों से देश की लिक्विफाइड नेचुरल गैस (The attacks affected the country’s liquefied natural gas.)  (LNG) एक्सपोर्ट कैपेसिटी 17 परसेंट कम हो गई है। कंपनी के CEO, साद शेरिदा अल-काबी ने चेतावनी दी कि ज़रूरी प्रोडक्शन फैसिलिटी (Essential production facilities) को हुए भारी नुकसान की भरपाई (compensation for loss) में कम से कम पांच साल लग सकते हैं। इस रुकावट के कारण कतर को हर साल लगभग US$20 बिलियन के रेवेन्यू का नुकसान होने की उम्मीद है, जिससे ग्लोबल मार्केट में गैस (Gas in global market) की कमी बढ़ना तय है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

यह संकट भारत (crisis india) के लिए खास तौर पर चिंता की बात है क्योंकि वह अपनी कुल LNG ज़रूरतों का लगभग आधा (47 प्रतिशत) अकेले कतर से इंपोर्ट करता है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (Petroleum Planning and Analysis Cell)  (PPAC) के डेटा के मुताबिक, भारत ने साल 2024 में 27.8 मिलियन मीट्रिक टन LNG इंपोर्ट किया था, जिसमें से 11.30 मिलियन मीट्रिक टन कतर ने सप्लाई (Qatar supplied million metric tons) किया था। कतर के ‘फोर्स मेज्योर’ घोषित करने की स्थिति में लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट पर असर पड़ेगा। इससे भारतीय घरेलू बाज़ार (Indian domestic market) में CNG, PNG और इंडस्ट्रियल गैस की उपलब्धता कम (Low availability of industrial gas) हो सकती है और कीमतों में तेज़ उछाल आने की संभावना है, जिसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था (Direct impact on the country’s economy)  पर पड़ेगा।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

मिसाइल हमलों (missile attacks) ने न केवल LNG प्लांट को, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी ‘गैस-टू-लिक्विड’ (पर्ल GTL) फैसिलिटी को भी निशाना (Facility also targeted) बनाया है। शेल द्वारा ऑपरेट किया जाने वाला यह प्लांट नेचुरल गैस को हाई-क्वालिटी क्लीनर फ्यूल (The plant converts natural gas into high-quality cleaner fuel) और लुब्रिकेंट में बदलता है। अल-काबी ने साफ किया कि प्लांट की दो मुख्य प्रोडक्शन लाइनों में से एक को गंभीर नुकसान (serious harm) हुआ है, जिसके कम से कम एक साल तक बंद रहने की उम्मीद है। इस संकट (crisis) का असर सिर्फ़ भारत पर ही नहीं, बल्कि चीन, दक्षिण कोरिया, इटली और बेल्जियम जैसे बड़े इंपोर्ट (big imports) करने वाले देशों पर भी पड़ेगा। भारत सरकार (Government of India) अब दूसरे देशों से गैस सप्लाई पक्का करने और स्ट्रेटेजिक रिज़र्व (Strategic Reserve) का इस्तेमाल करने पर विचार कर रही है।

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