संसदीय समिति की सिफारिश,निगरानी तंत्र बनाएं ‘संपत्ति का खुलासा नहीं करने पर दंडित हों आइएएस अफसर’

संसदीय समिति की सिफारिश,निगरानी तंत्र बनाएं‘संपत्ति का खुलासा नहीं करने पर दंडित हों आइएएस अफसर’
नई दिल्ली. पिछले साल 91 आइएएस अधिकारियों ने अपना अचल संपत्ति रिटर्न (आइपीआर) दाखिल नहीं किया। संसद की स्थायी समिति ने इस पर चिंता जताते हुए सुझाव दिया है कि तय समय सीमा के भीतर संपत्ति का ब्योरा दाखिल न करने वाले भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को दंडित किया जाए। पिछले साल भी 73 अधिकारियों ने अचल संपत्ति की जानकारी नहीं दी थी। कार्मिक, लोक शिकायत, कानून और न्याय संबंधी स्थायी संसदीय समिति ने अपनी 145वीं रिपोर्ट संसद में पेश करते हुए आइपीआर समय पर दाखिल करना सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीकृत अनुपालन निगरानी तंत्र स्थापित करने के लिए कहा है। इस तंत्र के तहत एक टास्क फोर्स गठित की जानी चाहिए, जो सभी अधिकारियों की स्थिति ट्रैक करने और रिपोर्ट दाखिल करने के लिए जिम्मेदार हो। गौरतलब है कि संसदीय समिति नियमों का अनुपालन नहीं होने पर दंड या उचित कार्रवाई का प्रस्ताव करती है।
1,316 पद खाली
रिपोर्ट में कहा गया कि देश में आइएएस अधिकारियों के 6,858 पद स्वीकृत हैं। इनमें 1,316 पद खाली हैं। समिति ने भर्ती प्रक्रिया को बढ़ाने के लिए त्वरित कार्रवाई का सुझाव दिया। समिति ने कहा कि आइएएस अधिकारियों की भर्ती के संबंध में चंद्रमौली समिति की रिपोर्ट का अध्ययन कर इसे लागू किया जा सकता है। समिति की सिफारिशें फिलहाल विचाराधीन हैं। आइएएस पदोन्नति कोटे में रिक्तियों का समय पर निर्धारण सुनिश्चित करने के लिए डीओपीटी की ओर से राज्य सरकारों के लिए ऑनलाइन ट्रैकिंग व पोर्टल शुरू करने का सुझाव दिया गया।