Mauganj MP: फर्जी मुकदमों के मामले में हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब।
मऊगंज .जिले में सामाजिक कार्यकर्ताओं को कथित रूप से फर्जी मुकदमों में गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने के मामले को माननीय उच्च न्यायालय मध्यप्रदेश, जबलपुर ने गंभीरता से लिया है।उच्च न्यायालय में दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने राज्य सरकार से विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने को कहा है कि किन परिस्थितियों में संबंधित लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।मामले में अधिवक्ता द्वारा प्रस्तुत तथ्यों पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने राज्य पक्ष को विस्तृत रिप्लाई दाखिल करने के लिए समय दिया और अगली सुनवाई 27 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है।
यह मामला मऊगंज जिले में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाने वाले मुद्रिका प्रसाद त्रिपाठी, रामेश्वर गुप्ता सहित अन्य लोगों को जेल भेजे जाने से जुड़ा बताया जा रहा है।जनचर्चा है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने पर कार्रवाई की गई, जिसे अब उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है।
सामाजिक कार्यकर्ता मुद्रिका प्रसाद त्रिपाठी ने कहा
यदि भ्रष्टाचार अन्याय और पुलिस अत्याचार का विरोध करने पर मुझ पर फर्जी मुकदमे लगाकर भ्रष्ट प्रशासन मेरी आवाज बंद करना चाहता है, तो यह मेरे देश के पवित्र संविधान का उल्लंघन है।मुझे आजीवन जेल में रहना भी स्वीकार है, ताकि देश को पता चल सके कि मऊगंज में जिला प्रशासन, कलेक्टर और पुलिस विभाग किस प्रकार काम कर रहा है।यदि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना अपराध है तो मैं यह अपराध जीवन भर करता रहूंगा।अब मऊगंज में प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली की निगरानी उच्च न्यायालय करेगा।
मऊगंज में प्रशासनिक अत्याचार पर अब हाईकोर्ट की नजर
मऊगंज में भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को जेल भेजे जाने के मामले में अब माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन बता पाएगा कि आखिर किन परिस्थितियों में सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेल भेजा गया।
अब मऊगंज में प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली की निगरानी उच्च न्यायालय करेगा।





