राजधानी भोपाल मेट्रो में फास्ट और लोकल मॉडल से घाटे का गणित कैसे बदलेगा?
BHOPAL NEWS: राजधानी भोपाल (Capital Bhopal) में मेट्रो रेल को शुरू (start metro rail) हुए लगभग दो महीने हो गए हैं, लेकिन उम्मीद के मुताबिक यात्रियों (passengers) की संख्या नहीं बढ़ी है। ऐसे में अब यह सुझाव दिया जा रहा है कि भोपाल मेट्रो (Bhopal Metro) में दो तरह की सर्विस शुरू (service started) की जाएं, एक फास्ट मेट्रो जो दो या तीन स्टेशन छोड़कर (leaving three stations) सीमित स्टॉप (limited stop) पर रुके और दूसरी लोकल मेट्रो जो हर स्टेशन (Local metro which runs from every station) पर रुके। माना जा रहा है कि इससे समय बचाने वाले यात्रियों को ऑप्शन (option for passengers) मिलेंगे और यात्रियों की संख्या (number of passengers) बढ़ सकती है।
राजधानी में मेट्रो का उद्घाटन (Metro inaugurated in the capital) 21 दिसंबर, 2025 को आम जनता (general public) के लिए किया गया था। अभी सुभाष नगर से एम्स तक लगभग सात किलोमीटर के कॉरिडोर पर आठ स्टेशन (Eight stations on the corridor) चल रहे हैं। अत्याधुनिक सुविधाओं (state-of-the-art facilities,) , CCTV निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था (security system) के बावजूद मेट्रो को अभी घाटा हो रहा है। जिसका मुख्य कारण कम दूरी और तुलनात्मक रूप (comparative forms) से ज़्यादा किराया बताया जा रहा है।
एक्सपर्ट्स (experts) का मानना है कि अगर मुंबई जैसे शहरों की तरह फास्ट और लोकल पैटर्न अपनाया (adopted local pattern) जाए, तो जल्दी पहुंचने वाले पैसेंजर कम स्टॉप वाली सर्विस (Passenger service with fewer stops) चुन सकते हैं, जिससे मेट्रो का इस्तेमाल बढ़ेगा। हालांकि, मेट्रो मैनेजमेंट (metro management) का कहना है कि देश में अभी किसी भी मेट्रो नेटवर्क पर ऐसा ऑपरेशन (Such operation on metro network) नहीं है और मेट्रो का नेचर फास्ट (The nature of the metro is fast) और रेगुलर सर्विस (regular service) है।
पब्लिक रिलेशन ऑफिसर (Public Relations Officer) के मुताबिक, अभी का ट्रैक छोटा है और भविष्य में करोंद (crores in future) तक बढ़ाने पर पैसेंजर की संख्या (number of passengers) अपने आप बढ़ने की संभावना है। उनका कहना है कि मेट्रो का मकसद प्रॉफिट कमाना (Metro aims to make profits) नहीं, बल्कि सुरक्षित (rather safe) और सुविधाजनक पब्लिक ट्रांसपोर्ट (convenient public transportation) देना है। इसके बावजूद, पूरे शहर में फास्ट बनाम लोकल मॉडल (Fast vs. Local Model in the City) पर चर्चा शुरू हो गई है, ताकि लोगों को मेट्रो सुविधा (metro facility) का पूरा फायदा मिलना शुरू (start getting benefits) हो सके।





