Rewa MP: फाइलेरिया मुक्त अभियान, 10 से 24 फरवरी तक चलेगा फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम,,
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विराट वसुंधरा
रीवा। जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा बताया गया कि राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत आगामी 10 फरवरी से 24 फरवरी 2026 तक मऊगंज जिले के हनुमना ब्लॉक को फाइलेरिया यानी हाथीपांव जैसी गंभीर बीमारी से मुक्त बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा अभियान शुरू किया है। 10 फरवरी से 24 फरवरी तक चलने वाले इस सामूहिक राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत विशेष अभियान चलाकर फाइलेरिया जैसे गंभीर रोग से लोगों को मुक्ति दिलाई जाएगी।
आज सीएमएचओ रीवा डॉ. यत्नेश त्रिपाठी ने पत्रकार वार्ता कर विस्तृत रणनीति साझा की और मीडिया से जनजागरूकता में सहयोग की अपील की। सीएमएचओ डॉ. यत्नेश त्रिपाठी ने बताया कि इस अभियान के तहत हनुमना ब्लॉक के सभी पात्र नागरिकों को फाइलेरिया रोधी दवा की खुराक दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, अत्यधिक बुजुर्गों और गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों को दवा नहीं दी जाएगी।
पत्रकार वार्ता में सीएमएचओ ने बताया कि फाइलेरिया मच्छरों के काटने से फैलने वाला खतरनाक परजीवी रोग है, जिसके लक्षण कई वर्षों बाद शरीर के अंगों, विशेषकर पैरों में सूजन के रूप में सामने आते हैं। इस बीमारी का स्थायी इलाज संभव नहीं है, इसलिए रोकथाम और समय पर दवा सेवन ही सबसे प्रभावी उपाय है उन्होंने कहा कि अफवाहों, लापरवाही और अज्ञानता के कारण बड़ी संख्या में लोग दवा खाने से इंकार कर देते हैं। यही चूक पूरे अभियान को न सिर्फ कमजोर कर देती है बल्कि मरीज के लिए घातक साबित होती है।
डॉ त्रिपाठी ने कहा कि मच्छर के माध्यम से फैलने वाला यह रोग धीरे-धीरे शरीर को खोखला करता है और हाथीपांव जैसी भयावह स्थिति पैदा कर देता है। इससे न केवल व्यक्ति की कार्यक्षमता खत्म होती है, बल्कि पूरा परिवार सामाजिक और आर्थिक रूप से टूट जाता है फाइलेरिया से बचाव के लिए सरकार हर वर्ष सामूहिक दवा सेवन अभियान के तहत घर-घर दवाएं पहुंचा रही है और डीईसी और एल्बेन्डाजोल जैसी दवाएं निःशुल्क दी जाती हैं।
सीएमएचओ डॉ रत्नेश त्रिपाठी ने कहा कि फाइलेरिया मरीज को दवा खाने में लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए खाली पेट दवा लेने य लापरवाही तथा अन्य कारणों से मरीज को कुछ दिक्कत हो सकती है इसके लिए जरूरी है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे अभियान से जुड़े स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों से उचित सलाह लेकर दवाइयों का सेवन करें।
यह समझना जरूरी है कि फाइलेरिया की दवा बीमार होने पर नहीं, बीमार होने से पहले खाई जाती है। स्वस्थ दिखने वाला व्यक्ति भी संक्रमण का वाहक हो सकता है। अगर वह दवा नहीं लेता, तो मच्छर के जरिए बीमारी आगे फैलती रहती है। यानी एक व्यक्ति की लापरवाही पूरे समाज पर भारी पड़ सकती है।
दूसरी ओर, स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य अमले की जिम्मेदारी भी केवल दवा बांटने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। लोगों को विश्वास में लेना, डर और भ्रांतियों को दूर करना तथा दवा को सामने खाकर दिखाना—ये सभी कदम उतने ही जरूरी हैं जितना अभियान का कैलेंडर।
आज जरूरत है इसे सरकारी योजना नहीं, बल्कि सामाजिक आंदोलन बनाने की। पंचायत, स्कूल, आंगनवाड़ी, धार्मिक और सामाजिक संगठनों को आगे आना होगा। जब तक समाज खुद जिम्मेदारी नहीं लेगा, तब तक फाइलेरिया कागजों में खत्म होगा, हकीकत में नहीं।
इस अवसर पर नोडल अधिकारी डॉ केबी गौतम ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा अभियान को चरणबद्ध तरीके से संचालित किया जाएगा। 10 और 13 फरवरी को चिन्हित बूथों पर दवा सेवन कराया जाएगा, जबकि 14 से 24 फरवरी तक स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर- घर जाकर लोगों को दवा खिलाएंगे। अभियान को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य अमले और प्रशासनिक अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है।
राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर 9 फरवरी को कलेक्ट्रेट सभागार में जिला टास्कफोर्स समिति की बैठक आयोजित की जाएगी, 7 फरवरी को जिला अस्पताल रीवा सभागार में जिला स्तरीय एडवोकेसी बैठक आयोजित कर अभियान की रूपरेखा और कार्ययोजना तय की गई है मीडिया कार्यशाला में पूरे कार्यक्रम का रूट चार्ट प्रस्तुत किया गया।





