Rewa MP:रायपुर कर्चुलियान तहसीलदार विनय मूर्ति शर्मा की तानाशाही,एक पक्षीय कार्रवाई और उजड़ गया रैन बसेरा हुए बेघर!
पंकज ने खरीदी थी जमीन हो गए बेदखल नहीं सुनी गई फरियाद,तहसीलदार पटवारी की भूमिका संदेह के दायरे में
रीवा .खबर मध्य प्रदेश के रीवा जिले के अंतर्गत रायपुर कर्चुलियान पटवारी हल्का महसुआ का है जहां भूमि स्वामी पंकज मिश्रा बाकायदा जमीन खरीद कर रजिस्ट्री के माध्यम से कास्तकाबिज थे तीरथ बनाम पंकज मिश्रा के खिलाफ बेदखली गायब हुआ जिसमें एक पक्षीय राजनीतिक दबाव के चलते आदेश बेदखली का पारित हुआ भूमि स्वामी पंकज मिश्रा की एक बात नहीं सुनी और तहसीलदार विनय मूर्ति शर्मा मनमानी तानाशाही एक राजनीतिक नेता के इशारे पर सारा खेल खेलते रहे और इस खेल में पटवारी हल्का आकांक्षा सिंह की भी भूमिका संदेह के दायरे में थी तीरथ मिश्रा से खास मोटी रकम लेकर बसी भूत हो गए और बिना सूचना के पंकज मिश्रा के स्थित आवास महसुआ में दो जेसीबी राजस्व अमला पुलिस बल और स्वयं तहसीलदार बिनय मूर्ति शर्मा दल बल का प्रयोग करते हुए बेदखल करते हुए मकान ध्वस्त कर दिए भूमि स्वामी की एक भी बात नहीं सुनी उन्होंने सीमांकन और नक्शा तरमीम आवेदन प्रस्तुत किए थे किंतु बगैर सीमांकन के ही मकान को ध्वस्त करना कहां तक उचित और न्याय संगत है बरहाल लोकतंत्र में लोकतंत्र का राजा जनप्रतिनिधि होता हैं यह ऐसे जनप्रतिनिधि हैं जो चाणक्य राजनीतिक बोले जाते हैं और वर्तमान में विधानसभा क्षेत्र गुढ से प्रतिनिधित्व कर रहे हैं सवाल यह उठता है कि जमीन पत्रक नहीं ठाकुरों से खरीदी हुई जमीन में अतिक्रमण का मामला कहां से आ गया पैतृक संपत्ति अगर होती माना जा सकता था बरहाल एक कहावत है सैया भाई कोतवाल डर काहे का उसी तर्ज पर तीरथ मिश्रा से मोटी रकम लेकर पंकज मिश्रा का बना बनाया घर उजड़ गया इस कार्यवाही से दुखी पंकज मिश्रा को न्याय मिलना अब संभव नहीं है साजिश रचने वाला उल्टा पुल्टा प्रतिवेदन देने वाली पटवारी को भी तीर्थ मिश्रा ने इतनी मोटी रकम दे दी कि वह मालामाल हो गई और प्रतिवेदन में उलझा दिया कि पंकज मिश्रा द्वारा अतिक्रमण किए हुए हैं जबकि मैदानी स्थल पर वास्तविकता कुछ और थी जिस आराजी पर बेदखल करने तहसीलदार की टीम पहुंची उस पर प्रधानमंत्री योजना के अंतर्गत सड़क निकली हुई है सड़क वाली एरिया में तीरथ मिश्रा वगैरा स्वयं अतिक्रमण किए हुए हैं जो बेदखली का मामला तहसीलदार के न्यायालय में लंबित है अगर उचित न्याय करना था तो तीर्थ मिश्रा और पंकज मिश्रा के अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ उनका भी अतिक्रमण शासकीय जमीन से तहसीलदार क्यों नहीं हटाए यह भी मामला संदेह के दायरे में है क्योंकि पंकज मिश्रा की तरफ से कोई राजनीतिक स्तर पर पकड़ नहीं है जिसके चलते उन्हें तहसीलदार ने बेदखल कर दिया और मकान को ध्वस्त कर दिया तहसीलदार विनय मूर्ति शर्मा और पटवारी के इस कार्यवाही की उच्च स्तरीय जांच भी होना अनिवार्य है क्योंकि बेदखली का मामला आदेश की चुनौती निगरानी कलेक्टर के यहां विचाराधीन है ऐसी स्थिति में बेदखल करना न्यायालय की भी अवहेलना होना पाया गया है किंतु यह मामला की चर्चा राजनीतिक गलियारों में हो रही है।





