Satna MP:जनता की पूरी-सब्जी पर भारी, मंत्री जी की छप्पन भोग वाली थाली!
मामला मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना सोहावल का हैं
सतना/सोहावल। कहते हैं कि शादियाँ तो स्वर्ग में तय होती हैं, लेकिन उनका ‘मेन्यू’ जमीन पर मौजूद ओहदे और रसूख तय करते हैं। मामला सतना के भाद चंडी माता मंदिर का है, जहाँ ‘मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना’ के तहत 200 जोड़ों का घर बसाया गया। लेकिन यहाँ जो हुआ, उसने ‘सबका साथ, सबका विकास’ के नारे को थाली के स्तर पर दो हिस्सों में बाँट दिया।
दो दुनिया, दो स्वाद
एक तरफ वे 200 नवदंपति और उनके परिवार थे, जिनके लिए पंडाल में ‘सादा जीवन, उच्च विचार’ वाली पूरी-सब्जी का इंतजाम था। दूसरी तरफ, राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी और उनके साथ पधारे अधिकारियों की ‘शाही टोली’ थी। इनके सामने मेजों पर फलों के पहाड़, मिठाइयों की नदियाँ और नमकीन के नखरे कुछ यूँ सजे थे कि साक्षात ‘छप्पन भोग’ सा नजारा नजर आ रहा था।
वीआईपी खान पान तंत्र बनाम आम जनता खान पान तंत्र
शायद प्रशासन को लगा होगा कि मुख्यमंत्री की योजना का असली आनंद तभी आता है जब जनता ‘खड़े-खड़े’ पूरी चबाए और खास मेहमान ‘बैठकर’ बादाम-किशमिश का लुत्फ उठाएं। मंत्री जी और अधिकारियों के सामने रखे वो केले, अंगूर और लजीज व्यंजन मानो चीख-चीख कर कह रहे थे “बेटा, पहले पद पाओ, फिर पकवान खाओ!”
सिस्टम पर पर खुलासा
अगर गरीब की शादी में भी साहबों को वही पूरी-सब्जी खानी पड़ जाती, तो शायद सिस्टम का ‘हाजमा’ बिगड़ जाता। आखिर जनता का टैक्स है, जनता के लिए पूरी-सब्जी है, और साहबों के लिए ‘विटामिन-युक्त’ ड्राई फ्रूट्स! योजना ‘मुख्यमंत्री’ की है, आशीर्वाद ‘माता रानी’ का है, लेकिन ‘स्वाद’ सिर्फ खास लोगों का है। बेचारे 200 जोड़े तो सिर्फ अपनी गृहस्थी की चिंता में थे, उन्हें क्या पता था कि उनके विवाह के पंडाल में ‘पकवानों का लोकतंत्र’ दम तोड़ चुका है।





