सोने और चांदी की कीमतों में उछाल, सोना ₹1400 और चांदी ₹4629 महंगा, शादियों के सीजन में खरीदारी के लिए जेब ढीली होगी
New Delhi: इंडियन कमोडिटी मार्केट (Indian Commodity Market) (MCX) में सुबह सोने (gold) और चांदी की कीमतों में तेजी (Silver prices rise) लौट आई। अप्रैल डिलीवरी वाला सोना (delivery gold) 1,368 रुपये बढ़कर 1,52,786 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया। वहीं, मार्च डिलीवरी वाली चांदी (silver for march delivery) 4,629 रुपये की लंबी छलांग (long jump) लगाकर 2,33,412 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रही है। मार्केट एक्सपर्ट्स (Market Experts) का कहना है कि इंटरनेशनल लेवल (international level) पर हो रही ‘शॉर्ट कवरिंग’ की वजह से कीमतों में यह उछाल (This surge in prices) आया है, जिससे इन्वेस्टर्स अब ऊंचे दामों (high prices) पर खरीदने को मजबूर (forced to buy) हो रहे हैं।
देश में सोने (gold in the country) और चांदी के प्रति आकर्षण (attraction to silver) अब तक के सबसे ऊंचे लेवल (high level) पर पहुंच गया है। डेटा के मुताबिक, जनवरी 2026 में भारत का सोने का इंपोर्ट पिछले (import last) साल के मुकाबले करीब 350 परसेंट बढ़कर $12 बिलियन हो गया है। चांदी का इंपोर्ट भी 127 परसेंट से ज़्यादा बढ़ा है। एक्सपर्ट्स (experts) का मानना है कि चल रहा शादियों का सीजन (wedding season) और सुरक्षित इन्वेस्टमेंट (safe investment) के तौर पर बढ़ता भरोसा (increasing trust) इस डिमांड की मुख्य (main demand) वजहें हैं। दिलचस्प बात यह है कि नई पीढ़ी (Gen Z) और मिलेनियल्स भी अब डिजिटल गोल्ड (Millennials can also now buy digital gold.) और फिजिकल ज्वेलरी में भारी इन्वेस्ट (Invest heavily in physical jewellery) कर रहे हैं।
पिछले 18 महीनों में सोने (gold) और चांदी की कीमतें दोगुनी से ज़्यादा (Silver prices more than doubled) हो गई हैं, जिससे मार्केट में उतार-चढ़ाव (market fluctuations) है। पिछले कारोबारी दिन (business day) कीमतों में तेज़ी से गिरावट 9sharp drop in prices) आई थी, लेकिन मार्केट (market) ने अपनी खोई हुई बढ़त वापस पा ली है। हालांकि, मौजूदा रिकॉर्ड लेवल को देखते हुए कई एक्सपर्ट्स (experts) अब बड़े इन्वेस्टमेंट को रिस्की (Risky investment) मान रहे हैं। ज़्यादातर खरीदार अब मार्केट में बड़ी गिरावट का इंतज़ार (Waiting for a big drop in the market) कर रहे हैं ताकि वे अपनी ज़रूरत के हिसाब से इन्वेस्ट या खरीदारी (investment or purchase) कर सकें। इंटरनेशनल मार्केट में उतार-चढ़ाव (Fluctuations in the international market) का असर घरेलू कीमतों (domestic prices) पर भी साफ़ तौर पर पड़ रहा है।





