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ममता बनर्जी आज सुप्रीम कोर्ट में वकील के अवतार में पेश होंगी; बंगाल वोटर लिस्ट विवाद पर चीफ जस्टिस के सामने खुद पेश करेंगी दलीलें, 1.25 करोड़ नामों से हंगामा मचा है

By: संवाददाता । विराट वसुंधरा

On: Wednesday, February 4, 2026 10:46 AM

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🕒 Updated: 04 Feb 2026, 10:46 AM

ममता बनर्जी आज सुप्रीम कोर्ट में वकील के अवतार में पेश होंगी; बंगाल वोटर लिस्ट विवाद पर चीफ जस्टिस के सामने खुद पेश करेंगी दलीलें, 1.25 करोड़ नामों से हंगामा मचा है

New Delhi:  पश्चिम बंगाल (west bengal) की मुख्यमंत्री (Chief Minister) ममता बनर्जी आज सुप्रीम कोर्ट में ऐतिहासिक भूमिका (Historical role in the Supreme Court) में पेश हो सकती हैं। बंगाल वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इन-डेप्थ रिवीजन’ (SIR) विवाद पर दायर याचिकाओं की सुनवाई (Hearing of petitions filed) के दौरान ममता बनर्जी खुद अपनी दलीलें पेश कर सकती हैं। चीफ जस्टिस सूर्यकांत (Chief Justice Surya Kant) की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यों की बेंच इस संवेदनशील (Sensitive) मामले की सुनवाई करेगी। चूंकि मुख्यमंत्री ने कानून की पढ़ाई (Chief Minister studied law) की है, इसलिए TMC सूत्रों का दावा है कि वह चुनाव आयोग के कामकाज (functioning of election commission)  और वोटरों के नाम काटने के मुद्दे पर सीधे कोर्ट से बात करना चाहती हैं।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

इस कानूनी लड़ाई (legal battle) के केंद्र में चुनाव आयोग (Election Commission at the Center) द्वारा पहचानी गई ‘लॉजिकल गड़बड़ियों’ की लिस्ट है। TMC ने आरोप लगाया है कि 2002 की वोटर लिस्ट (voter list) से मिलान के दौरान तकनीकी आधार पर करीब 1.25 करोड़ वोटरों के नाम संदिग्ध लिस्ट (suspect list)  में डाल दिए गए हैं। इनमें माता-पिता और बच्चे की उम्र में थोड़ा अंतर या स्पेलिंग की गलतियाँ (Spelling mistakes) जैसे कारण शामिल हैं। ममता बनर्जी का तर्क है कि इन गड़बड़ियों के नाम पर असली वोटरों को वोट देने से रोकना लोकतंत्र (stop democracy) के लिए एक बड़ा खतरा है। TMC MP डेरेक ओ’ब्रायन ने भी कमीशन पर सवाल उठाते (raise questions on commission) हुए इस प्रोसेस को ‘मनमाना’ बताया है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

मुख्यमंत्री (Chief Minister) ने अपनी याचिका में चुनाव आयोग को पार्टी (Party to Election Commission) बनाया है और मांग की है कि जब तक सभी दावों और आपत्तियों (objections) का पूरी तरह से निपटारा नहीं हो जाता, तब तक फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश न की जाए। इससे पहले, 19 जनवरी को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसपेरेंसी (Transparency) और सरकारी दफ्तरों में गड़बड़ी (Disturbances in government offices) वाली लिस्ट दिखाने का आदेश दिया था। आज की सुनवाई राजनीतिक रूप से भी अहम है क्योंकि 2026 के बंगाल विधानसभा चुनावों (bengal assembly elections) की गहमागहमी के बीच यह मुद्दा ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता (big priority) बन गया है।

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