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दिल्ली में भारत-चीन की हाई-लेवल मीटिंग; चीन ने UNSC में भारत की परमानेंट मेंबरशिप का सपोर्ट किया, बॉर्डर विवाद सुलझाने और डायरेक्ट फ्लाइट्स फिर से शुरू करने पर सहमति जताई

By: संवाददाता । विराट वसुंधरा

On: Wednesday, February 11, 2026 8:56 AM

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🕒 Updated: 11 Feb 2026, 08:56 AM

दिल्ली में भारत-चीन की हाई-लेवल मीटिंग; चीन ने UNSC में भारत की परमानेंट मेंबरशिप का सपोर्ट किया, बॉर्डर विवाद सुलझाने और डायरेक्ट फ्लाइट्स फिर से शुरू करने पर सहमति जताई

New Delhi:   भारत के फॉरेन सेक्रेटरी विक्रम मिसरी  (Foreign Secretary Vikram Misri) और चीन के एग्जीक्यूटिव डिप्टी (Executive Deputy) फॉरेन मिनिस्टर मा झाओक्सू ने मंगलवार को नई दिल्ली में एक बहुत ज़रूरी मीटिंग की। BRICS शेरपा मीटिंग के सिलसिले (regarding the meeting) में भारत आए चीनी मिनिस्टर के साथ बातचीत में दोनों देशों के रिश्तों को पटरी पर लाने पर फोकस रहा। सबसे बड़ी कामयाबी यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल  (United Nations Security Council) (UNSC) में सुधारों को लेकर मिली, जहाँ चीन ने पहली बार परमानेंट मेंबरशिप (Permanent Membership) के लिए भारत की उम्मीदों का सम्मान और सपोर्ट करने का पॉजिटिव संकेत (positive sign) दिया है। गलवान वैली विवाद के बाद दोनों देशों के बीच यह सबसे असरदार डिप्लोमैटिक बातचीत (Effective diplomatic dialogue) मानी जा रही है।

 

 

 

 

 

 

 

मीटिंग (Meeting) के दौरान दोनों देश इस बात पर सहमत हुए कि ग्लोबल स्टेबिलिटी (global stability)  के लिए लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल  (of actual control) (LAC) पर शांति बनाए रखना ज़रूरी है। एक्सटर्नल अफेयर्स सेक्रेटरी (External Affairs Secretary) विक्रम मिसरी ने बॉर्डर से जुड़े सेंसिटिव मुद्दों को सुलझाने के साथ-साथ कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू करने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में इस दौरे का दायरा और बढ़ाया जाएगा। दोनों पक्षों ने माना कि प्रधानमंत्री (External Affairs Secretary) नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बनी साझा समझ को ज़मीनी स्तर पर असरदार (effective) तरीके से लागू करना आपसी विश्वास बहाल करने के लिए ज़रूरी है।

 

 

 

 

 

 

 

दोनों देशों ने आर्थिक (Economic)  और सिविल संबंधों (civil relations) को मज़बूत करने के लिए जल्द ही एयर सर्विस एग्रीमेंट को फ़ाइनल  (Finalize the service agreement) करने का वादा किया है। इसके तहत, भारत और चीन के बीच सीधी हवाई सेवाएँ जल्द ही बहाल हो सकती हैं। साथ ही, व्यापार, पर्यटन और एकेडमिक लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए वीज़ा प्रक्रियाओं को आसान बनाने पर भी प्रैक्टिकल सहमति  (practical consent) बनी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, यह मीटिंग भविष्य में दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।

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