मिडिल ईस्ट युद्ध से भारत के पोर्ट जाम, 23,000 कंटेनर फंसे, बासमती और फलों का एक्सपोर्ट रुका, बाज़ारों में कीमतें गिरी, किसानों को करोड़ों का नुकसान
Mumbai/Mundra: इज़राइल-ईरान के बीच चल रहे झगड़े (fights) और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने भारत के पश्चिमी तटों (Rising tensions in the Middle East have affected India’s western coast.) पर मौजूद JNPT (JNPT) और मुंद्रा पोर्ट को संकट में डाल दिया है। होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षा खतरों (Security threats in the Strait of Hormuz) के कारण बड़ी शिपिंग लाइनों ने बुकिंग रोक (Major shipping lines have stopped bookings.) दी है, जिससे पोर्ट पर ही करीब 23,000 कंटेनर फंस गए हैं। इस रुकावट ने बासमती चावल, अंगूर, प्याज और मीट जैसे महंगे प्रोडक्ट्स का एक्सपोर्ट (Export of expensive products) पूरी तरह से रोक दिया है। एक्सपोर्ट रुकने से घरेलू बाज़ारों में स्टॉक जमा (Stock piled up in domestic markets due to halt in exports) हो गया है, जिससे वाशी जैसे थोक बाज़ारों में केले और दूसरे फलों की कीमतें 40% तक गिर गई हैं।
युद्ध का असर सिर्फ एक्सपोर्ट (The impact of the war is only on exports.) तक ही नहीं है, बल्कि इंपोर्ट सेक्टर (import sector) पर भी बहुत बुरा असर पड़ा है। लगभग 300,000 टन सल्फर और जिप्सम के शिपमेंट (shipment of gypsum) में देरी हो रही है, जबकि बंदर अब्बास जैसे हब पर ड्राई फ्रूट्स के सैकड़ों कंटेनर फंसे हुए हैं। व्यापारियों को पोर्ट पर फंसे (Traders stranded at port) हर कंटेनर के लिए हर दिन ₹8,500 का भारी स्टोरेज और बिजली चार्ज देना पड़ रहा है, जिससे बिजनेस पर आर्थिक बोझ बर्दाश्त से बाहर होता जा रहा है। अगर यह रुकावट बनी रही, तो मैन्युफैक्चरिंग और फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री की लागत (Cost of food processing industry) बढ़ने की संभावना है।
भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती एनर्जी सिक्योरिटी (Big challenge energy security) को लेकर खड़ी हुई है, क्योंकि देश का 85% LPG (LPG) और 55% LNG (LNG) इंपोर्ट होर्मुज रूट पर निर्भर है। युद्ध के कारण पांच बड़े गैस कैरियर जहाजों (large gas carrier ships) का रूट बदल दिया गया है या फिलहाल रोक दिया गया है। इससे घरेलू LPG की बढ़ती कीमतों और इंडस्ट्रियल फ्यूल की कमी का सीधा खतरा (Direct threat of shortage of industrial fuel) है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यह संघर्ष लंबा चला, तो इसका भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ रेट (Growth rate of Indian economy) और आम आदमी की जेब पर व्यापक (Wide on the pocket of the common man) और लंबे समय तक असर पड़ेगा।





