MP news: कलेक्टर को न्यायाधीश ने जारी किया कारण बताओ सूचना पत्र , आदेश की अवहेलना पर शासकीय वाहन एवं कार्यालय की कुर्सी की हो सकती है कुर्की साथ ही दंडात्मक कार्यवाही।
छतरपुर .छतरपुर जिला न्यायलय के व्यवहार न्यायाधीश दिव्यांशु गुप्ता ने एक जमीनी मामले में न्यायलय के आदेश की अवहेलना पर छतरपुर कलेक्टर के द्वारा न्यायालय के आदेश का पालन न करने पर कारण बताओ सूचना पत्र प्रेषित किया कि न्यायालयीन आदेश की अवहेलना करते हुए वांछित पालन प्रतिवेदन पेश न करने एवं निष्पादन कार्यवाही में असहयोग व रुकावट कारित करने के कारण, क्यों न उनके शासकीय वाहन एवं कार्यालय की कुर्सी को विधि अनुसार कुर्क किया जावे तथा अवमानना के संबंध में क्यों न उनके विरुद्ध दण्डात्मक कार्यवाही की जावे।
एडवोकेट वशिष्ठ नारायण श्रीवास्तव ने बताया कि ग्राम बकायन, तहसील व जिला छतरपुर में स्थित वादग्रस्त भूमि सर्वे नंबर 613 रकबा 2.74 एकड़ एवं सर्वे नंबर 640/1, रकबा 8.38 एकड़, कुल रकबा 11.12 एकड़ का पट्टा वादी दयाराम काछी तनय करंजू काछि को प्रतिवादी/म प्र शासन द्वारा संवत 2017 में दिनांक 31.05.1960 को प्रदान किया गया था। वादी ने अपने प्रकरण मे लेख किया कि पट्टा प्राप्त होने के पश्चात से राजस्व अभिलेखों में वादग्रस्त भूमि वादी के स्वत्व व आधिपत्य की हैसियत से दर्ज की जाती रही है तभी से वादी उक्त भूमि पर काबिज होकर कृषि कार्य कर रहा है और उसने उक्त भूमि पर पक्का मकान भी बनाया है, जिसमे वादी सपरिवार निवासरत है। वादग्रस्त भूमि छतरपुर शहर से लगी हुई है, इसलिये उक्त भूमि को हड़पने के उद्देश्य से वादी के रंजिशी व्यक्तियों द्वारा झूठी शिकायत किये जाने पर तहसीलदार छतरपुर ने प्रकरण कमांक 425/बी-121/2010-11 प्रस्तुत किया जिसमें तहसीलदार छतरपुर ने दिनांक 20.06.12 को आदेश पारित कर उक्त भूमि पर म०प्र० शासन का नाम दर्ज करने का आदेश पारित कर दिया । वादग्रस्त भूमि वर्ष 1960 से 2012 तक बादी के स्वत्व एवं आधिपत्य के रूप में दर्ज होती चली आ रही है इसलिये राजस्व अभिलेखों में किये गये निरंतर इंद्राजों को शिकायत के आधार पर निरस्त करने का क्षेत्राधिकार तहसीलदार छतरपुर को नहीं है।
इस आदेश के विरुद्ध वादी द्वारा अनुविभागीय अधिकारी छतरपुर के न्यायालय में अपील प्रस्तुत की गई थी, जो दिनांक 30.08.14 को निरस्त कर दी गई है। म०प्र० शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों एवं गजट नोटिफिकेशन के अनुसार वर्ष 1975 के पूर्व प्रदान किये जाने वाले समस्त पट्टों के पट्टाधारकों को स्वमेव ही भूमि स्वामी स्वत्व प्रदान किये गये हैं। चाहे पट्टा कितनी ही अवधि का क्यों न हो. उन्हें पट्टों का नवीनीकरण कराने की आवश्यकता नहीं है। उसके बावजूद भी वादी का नाम राजस्व अभिलेखों में काटकर म०प्र० शासन का नाम दर्ज कर दिया गया है। राजस्व अभिलेखों में वादी की फसलों एवं उसके पक्के मकान का इंद्राज भी निरंतर होता रहा है। वादी वादग्रस्त भूमि पर वर्ष 1960 से निरंतर आधिपत्य में रहा है और भूमि स्वामी के रूप में उसका नाम दर्ज होता आ रहा है, इन सभी बातों को लेकर और तथ्यों और साक्ष्य को लेकर वादी के द्वारा व्यवहार न्यायाधीश के न्यायालय में राजस्व रिकॉर्ड से मध्य प्रदेश शासन गलत दर्ज होना और स्वयं को भूमि स्वामी घोषित करने के एवरेज में प्रकरण प्रस्तुत किया परंतु तत्कालीन व्यवहार न्यायाधीश ने आवेदक के द्वारा प्रस्तुत प्रकरण में आवेदक को भूमि स्वामी अधिकार प्रदत ना करते हुए मध्य प्रदेश शासन की भूमि मानते हुए प्रकरण खारिज कर दिया।
परंतु इसी बीच वादी दयाराम की मृत्यु हो गई और दयाराम के पुत्र दामोदर कुशवाहा और गोविंद दास कुशवाहा ने तत्कालीन अधीनस्थ न्यायालय के आदेश की अपील षष्टम अपर जिला सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में 22 जुलाई 2016 को प्रस्तुत हुई और उनके द्वारा अधीनस्थ न्यायालय के आदेश को उलटते हुए दामोदर कुशवाहा और गोविंद दास कुशवाहा पुत्र स्वर्गीय दयाराम कुशवाहा को भूमि स्वामी स्वत्व के रूप में मानते हुए आदेश दिनांक 26/07/2019 में अपील न्यायलय द्वारा आदेश पारित करते हुए यह लेख किया कि वादी के भूमि खसरा नंबर 613 रकवा 2.74 एकड़ एवं खसरा नंबर 640/1 रकवा 8.38 हे भूमि स्थित ग्राम बकायन तहसील व जिला छतरपुर पर वादी /डिक्रिदार ही भूमि स्वामी एवं आधिपत्य धारी होगा और इस भूमि पर स्थाई रूप से स्टे भी हमेशा बना रहेगा। परंतु शासन के द्वारा अपिलीय न्यायालय के आदेश का पालन नहीं किया गया,तब आवेदक गणों ने आपिलीय न्यायालय के आदेश के कुछ दिवस गुजरने के पश्चात डिकी के पालन में वादग्रस्त भूमि राजस्व अभिलेख में दर्ज कराये जाने को कहा है।
इसी बीच न्यायालय तहसीलदार के प्रकरण के यहाँ एक प्रकरण मे पारित आदेश दिनांक 03.10.2023 जिसमें प्रकरण की स्थिति का वर्णन किया गया है। और न्यायालय कमिश्नर सागर संभाग के प्र.क.में पारित आदेश दिनांक 26.09.2022 के अनुसार व्यवहार न्यायालय के निर्णय व डिकी के प्रकाश में न्यायालय कलेक्टर छत्तरपुर का प्र.क्र. 15/ निगरानी/2019-20 में पारित आदेश दिनांक 23.01.2020 निरस्त किया गया था। न्यायालय कमिश्नर के आदेश दिनांक 26.09.2022 एवं षष्टम अपर जिना न्यायाधीश छतरपुर के प्रकरण आरसीए 127/2016 में पारित निर्णय दिनांक 26.07.2019 का पालन करते हुए न्यायालय तहसीलदार द्वारा वादग्रस्त भूमि के राजस्व अभिलेख में शासन के स्थान पर वादी का नाम दर्ज किए जाने का आदेश पारित किया गया था एवं हलका पटवारी को राजस्व रिकार्ड अद्यतन करने का आदेश किया गया था। परंतु आदेश पालन दिनांक तक कमिश्नर सागर संभाग एवं माननीय षष्टम अपर जिला न्यायाधीश छतरपुर के आदेशों का पालन नहीं किया गया है एवं न ही न्यायालय तहसीलदार के प्र. क्र के आदेश दिनांक 03.10.2023 का पालन करते हुए राजस्व रिकार्ड अद्यतन कराया गया है।
वादी के द्वारा अपिलीय आदेश के क्रियान्वयन के लिए अधीनस्थ न्यायालय व्यवहार न्यायाधीश दिव्यांशु गुप्ता के न्यायालय में आदेश के पालन के लिए भी प्रकरण प्रस्तुत किया, जिसमें न्यायाधीश द्वारा दिनांक 28/02/2026 को प्रकरण कलेक्टर छतरपुर की ओर से पालन प्रतिवेदन हेतु नियत किया था वादी /डिकीदार की ओर से न्यायालय के समक्ष दिनांक 28/02/206 को पुनः यह प्रकट किया गया कि न्यायालय के आदेश दिनांक 31.01.2026 का पालन आज दिनांक तक म.प्र शासन की ओर से नहीं किया गया है।जिसमे यह लेख किया गया था कि प्रति कलेक्टर छतरपुर को भेजी जावे कि आदेश के पालन मे आदेश व निर्णय व डिक्री के पालन मे आवेदकगणो की भूमियो का नामंत्रण किया जावे।साथ ही अपिलीय आदेश की एक सत्यप्रतिलिपि कलेक्टर छतरपुर को इस टीप के साथ प्रेषित की जावे कि आदेश के पालन में निर्णय व डिकी अनुसार वादग्रस्त भूमि का नामांतरण डिक्रीधारीगण के पक्ष में किया जाकर दो सप्ताह के भीतर पालन प्रतिवेदन इस न्यायालय को प्रेषित करें,जिस हेतु पेशी दिनांक 19.02.2026 नियत की गयी थी। दिनांक 19.02.2026 को शासन की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ तथा आदेश का पालन भी नहीं किया गया। फलतः कलेक्टर छतरपुर को पुनः पत्र प्रेषित किया गया था कि आदेश का पालन न किये जाने पर उनके विरुद्ध उचित वैधानिक कार्यवाही की जावेगी।जिसके लिए 28/02/2026 पेशी नियत की गई, परन्तु पेशी दिनांक तक कलेक्टर छतरपुर की ओर से आदेश का पालन न करते हुए कोई पालन प्रतिवेदन न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया है। जिससे स्पष्ट रूप से दर्शित होता है किकलेक्टर छतरपुर द्वारा न्यायालय के आदेश की अवमानना की जा रही है एवं निष्पादन के संबंध में खुले तौर पर असहयोग का व्यवहार किया जा रहा है।जिस पर व्यवहार न्यायाधीश दिव्यांशु गुप्ता ने आदेश करते हुये लेख किया कि यह निष्पादन प्रकरण दिनांक 24.12.2024 को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया था, अतः प्रकरण का निराकरण शीघ्रतिशीघ्र किया जाना है, परन्तु कलेक्टर छतरपुर की ओर से न्यायालयीन आदेश की खुली अवहेलना किये जाने से माननीय सर्वोच्च न्यायालय की मंशा अनुसार प्रकरण का निराकरण सम्भव नहीं हो पा रहा है।
कलेक्टर छतरपुर का यह आचरण निन्दनीय है एवं उनके द्वारा अपने पदेन कर्तव्यों का निर्वहन नहीं किया जा रहा है। ऐसी परिस्थिति में कलेक्टर छतरपुर को इस आशय का कारण बताओ सूचना पत्र प्रेषित किया जावे कि न्यायालयीन आदेश की अवहेलना करते हुए वांछित पालन प्रतिवेदन पेश न करने एवं निष्पादन कार्यवाही में असहयोग व रुकावट कारित करने के कारण, क्यों न उनके शासकीय वाहन एवं कार्यालय की कुर्सी को विधि अनुसार कुर्क किया जावे तथा अवमानना के संबंध में क्यों न उनके विरुद्ध न्यायालय अवमान अधिनियम 1971 की धारा-12 तथा भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 210(बी) के अन्तर्गत दण्डात्मक कार्यवाही की जावे।





