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चेन्नई में गैस संकट, फ्यूल की कमी के कारण मेडिकल कॉलेज को हॉस्टल खाली करने का आदेश, ऑनलाइन पढ़ाई, होटल के मेन्यू से डिश गायब

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🕒 Updated: 12 Mar 2026, 10:31 AM

चेन्नई में गैस संकट, फ्यूल की कमी के कारण मेडिकल कॉलेज को हॉस्टल खाली करने का आदेश, ऑनलाइन पढ़ाई, होटल के मेन्यू से डिश गायब

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में कमर्शियल गैस (commercial gas) की भारी कमी (severe shortage) ने अब स्टूडेंट्स के भविष्य पर खतरा पैदा (Students’ future is at risk) कर दिया है। शहर के एक जाने-माने प्राइवेट मेडिकल कॉलेज ने गैस की कमी (Private medical college faces gas shortage)  के कारण हॉस्टल मेस में खाना बनाने में असमर्थता जताई है। कॉलेज एडमिनिस्ट्रेशन (college administration) ने 12 मार्च से 25 मार्च तक रेगुलर क्लास सस्पेंड (Regular classes suspended) कर दी हैं और स्टूडेंट्स को हॉस्टल खाली (Hostels are vacant for students) करके घर जाने का निर्देश दिया है। इस दौरान मेडिकल की पढ़ाई ऑनलाइन मोड (medical education online mode) में होगी। अचानक आए इस आदेश से हॉस्टल (hostel by order) में रहने वाले स्टूडेंट्स में घबराहट फैल (Panic spread among students) गई है, क्योंकि बिना खाने के हॉस्टल में रहना नामुमकिन (Impossible to stay in hostel) हो गया है।

 

 

 

 

 

 

 

 

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, गैस की यह अभूतपूर्व कमी (This unprecedented gas shortage) सीधे तौर पर पश्चिम एशिया में चल रहे युद्धों और संघर्षों से जुड़ी (associated with wars and conflicts)  है। भारत अपनी LPG (LPG) जरूरतों के लिए कुवैत, कतर और सऊदी अरब जैसे देशों पर निर्भर  (depend on countries) है, जहां से सप्लाई चेन में रुकावट (supply chain disruption) के कारण इंपोर्ट बहुत कम हो गया है। केंद्र सरकार ने घरेलू ग्राहकों (The central government has) के लिए गैस सप्लाई पक्की करने को प्राथमिकता (Priority given to ensuring gas supply) दी है, जिससे कमर्शियल सिलेंडर का प्रोडक्शन या तो बंद हो गया है या बहुत कम हो गया है। इसका सबसे बुरा असर चेन्नई की होटल और केटरिंग इंडस्ट्री (catering industry) पर पड़ा है, जिससे बिज़नेस ठप (business stalled) हो गया है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

शहर के रेस्टोरेंट (city ​​restaurants) और खाने की जगहों ने फ्यूल बचाने के लिए अपने मेन्यू में भारी कटौती (Major menu cuts) की है। सांभर, रसम और पोरियल जैसी कई डिश लंच प्लेट से गायब हो गई हैं और अब सिर्फ़ लेमन राइस या टोमैटो राइस जैसी सिंपल डिश ही परोसी जा रही हैं। नुंगमबक्कम और एग्मोर जैसे इलाकों में चाय की दुकानों ने स्नैक्स बनाना बंद कर दिया है। लकड़ी और चारकोल की बढ़ती मांग ने उनके दाम 1,000 रुपये प्रति टन तक बढ़ा दिए हैं। अगर जल्द ही सप्लाई ठीक नहीं हुई, तो शहर के हज़ारों छोटे और मीडियम साइज़ के होटल हमेशा (Medium sized hotels always) के लिए बंद हो सकते हैं।

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