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एलिजिबिलिटी एग्जाम का विरोध करने वाले टीचरों ने सुसाइड की मांग की

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🕒 Updated: 14 Mar 2026, 04:58 AM

एलिजिबिलिटी एग्जाम का विरोध करने वाले टीचरों ने सुसाइड की मांग की

SATNA NEWS:  टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (Teacher Eligibility Test) (TET) से छूट की मांग को लेकर सतना में टीचरों ने विरोध प्रदर्शन (teachers protest) किया है। शुक्रवार शाम को सैकड़ों टीचरों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर राष्ट्रपति (President reached the Collectorate) के नाम ADM को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में राइट टू एजुकेशन एक्ट लागू होने से पहले नियुक्त टीचरों को TET से छूट देने की मांग की गई है। मांगें पूरी न होने पर सामूहिक सुसाइड की चेतावनी (Mass suicide warning) भी दी गई है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

टीचरों (teachers) ने बताया कि यह प्रोसेस डायरेक्टोरेट ऑफ पब्लिक एजुकेशन (Process Directorate of Public Education,) , भोपाल की तरफ से 2 मार्च, 2026 को जारी लेटर के आधार पर शुरू किया गया है। इसके तहत राइट टू एजुकेशन एक्ट लागू होने से पहले नियुक्त टीचरों (appointed teachers) के लिए भी इसे अनिवार्य कर दिया गया है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

टीचरों के मुताबिक, यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट (system supreme court) के 1 सितंबर, 2025 के फैसले के बाद लागू की जा रही है। आदेश में कहा गया है कि अगर टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट पास नहीं करते हैं, तो उन्हें अयोग्य माना जा सकता है और सर्विस टर्मिनेट (service terminate) की कार्रवाई की जा सकती है। ज्ञापन में कहा गया है कि राज्य में हजारों टीचर हैं जो पिछले 20 से 25 सालों से बेहतरीन सर्विस दे रहे हैं। सर्विस के आखिरी सालों में ज़रूरी एलिजिबिलिटी टेस्ट (eligibility test) ने उनमें मानसिक तनाव और कन्फ्यूजन की स्थिति पैदा (creating a state of confusion) कर दी है। टीचरों का कहना है कि इतने सालों की सर्विस के बाद नौकरी खत्म (Termination of service after) होने का खतरा उनके सम्मान और भविष्य दोनों के लिए गंभीर संकट (Serious danger for both the future)  पैदा कर सकता है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखने की मांग
टीचरों ने सरकार से अपील(Teachers appealed to the government)  की है कि वह सुप्रीम कोर्ट में उनका पक्ष रखते हुए फैसले पर फिर से विचार करे। साथ ही राष्ट्रपति से भी रिक्वेस्ट की है कि राइट टू एजुकेशन एक्ट लागू (Right to Education Act implemented) होने से पहले नियुक्त सभी टीचरों को एलिजिबिलिटी टेस्ट (Eligibility test for teachers) से छूट दी जाए।
टीचरों का कहना है कि उनकी नियुक्ति उस समय (appointment at that time) के नियमों के अनुसार हुई थी, इसलिए बाद में लागू हुए नियमों के आधार पर उनकी सर्विस पर सवाल उठाना ठीक नहीं है। ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि अगर उन्हें TET से मुक्त नहीं किया गया तो उन्हें सामूहिक इच्छामृत्यु की इजाजत (Mass euthanasia allowed) दी जाए।

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