रीवा जिले में 62 करोड़ रुपये से ज़्यादा का बिजली बिल सरकारी विभाग क्यों दबाए बैठा है?
REWA NEWS: बिजली विभाग (electricity department) जहां करोड़ों रुपये बिजली उपभोक्ताओं का दबाए (Crores of rupees of electricity consumers withheld) बैठा है. तो वही सरकारी विभाग (government department) भी पीछे नहीं है. अलग-अलग विभागों ने 62 करोड़ रुपये से ज़्यादा का बिल नहीं भरा है और विभाग के अधिकारी रिकवरी (Department Officer Recovery) के लिए जूझ रहे हैं. फाइनेंशियल ईयर खत्म (Financial year ends) होने में 10 दिन से भी कम समय बचा है.
गौरतलब है कि बिजली विभाग (electricity department) का करोड़ों रुपये उपभोक्ताओं के बीच फंसा हुआ है. हर महीने टारगेट रेवेन्यू (target revenue) भी पूरी तरह से वसूल नहीं हो पा रहा है. उपभोक्ताओं से रिकवरी के लिए कनेक्शन काटने (Disconnection of consumers for recovery) और अकाउंट बंद (account closed) करने के लिए जिले भर में कुर्की की कार्रवाई चल रही है. नतीजतन उपभोक्ता पैसे जमा (As a result consumer money deposited) भी कर रहे हैं. रिकवरी के मामले में सिटी डिवीजन हमेशा (city division always) आगे रहता है. इस बार भी अच्छा रेवेन्यू मिला है लेकिन ईस्ट और वेस्ट डिवीजन की रिकवरी (West Division Recovery) सबसे कम है. कनेक्शन काटने (cutting connections) और रिकवरी को लेकर सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर (superintendent engineer) से लेकर लाइन मैन तक फील्ड में हैं. फिर भी टारगेट के हिसाब से रेवेन्यू (Revenue as per target) नहीं मिल पा रहा है. दूसरी तरफ सरकारी विभाग (government department) भी पैसे जमा करने में आनाकानी कर रहे हैं.
पंचायत विभाग पर सबसे ज़्यादा बकाया
पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग (Rural Development Department) पर 40.38 करोड़ रुपये, महिला और बाल विकास विभाग (Child Development Department) पर 6.41 करोड़ रुपये, स्कूल शिक्षा विभाग पर 4.01 करोड़ रुपये, शहरी विकास 9urban development) और आवास विभाग (housing department) पर 3.66 करोड़ रुपये, जल संसाधन विभाग (Water Resources Department) पर 3.44 करोड़ रुपये बकाया है। लोक स्वास्थ्य (public health) और परिवार कल्याण विभाग (Family Welfare Department) पर 98 लाख रुपये, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग 9Public Health Engineering Department) पर 38 लाख रुपये, आदिम जाति कल्याण विभाग पर 35 लाख रुपये, लोक निर्माण विभाग (Public Works Department) पर 25 लाख रुपये, उच्च शिक्षा विभाग (Higher Education Department) पर 17 लाख रुपये, राजस्व विभाग पर 12 लाख रुपये, गृह विभाग (home department) पर 38 लाख रुपये, वन विभाग पर 6 लाख रुपये, कृषि विभाग (Agriculture Department) पर 4 लाख रुपये बकाया है।
वसूली को लेकर जिले भर में कार्रवाई चल रही है
सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर (Superintending Engineer) बी.के. शुक्ला ने बताया कि मार्च में फाइनेंशियल ईयर खत्म (Financial year ends) होना है। हमारी पूरी कोशिश है कि ज़्यादा से ज़्यादा रेवेन्यू आए और लक्ष्य हासिल (target achieved) किया जाए। सरकारी विभागों (government departments) पर करीब 62 करोड़ रुपये के बिल बकाया हैं। जिसके लिए पत्राचार किया जा रहा है। उम्मीद है कि इस महीने के आखिर तक काफी पैसा आ जाएगा। दूसरी तरफ, कंज्यूमर्स से वसूली के लिए लगातार अभियान (Campaign) चलाया जा रहा है। कनेक्शन काटने (cutting connections) की कार्रवाई की जा रही है और कंज्यूमर्स कार्रवाई (Consumers’ Action) से बचने के लिए पैसे भी जमा कर रहे हैं।





