Rewa MP:संजय गांधी अस्पताल की साख पर भारी निजी क्लीनिक, कब जागेगा जिला प्रशासन!
डॉक्टर कॉलोनी में बेखौफ चल रहा प्राइवेट प्रैक्टिस का खेल कलेक्टर सूर्यवंशी से इलैयाराजा टी जैसे कड़क एक्शन की आस
रीवा .संभाग के सबसे बड़े चिकित्सा केंद्र, संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय की व्यवस्थाएं एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं।अस्पताल के ठीक बगल में स्थित डॉक्टर कॉलोनी इन दिनों सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस का मुख्य केंद्र बन चुकी है।आरोप है कि अस्पताल में ड्यूटी के घंटों के दौरान भी डॉक्टर अपने सरकारी दायित्वों को दरकिनार कर निजी क्लीनिकों में अधिक समय बिता रहे हैं।क्षेत्रीय जनता और मरीजों के परिजनों के बीच अब यह बड़ा सवाल बन गया है कि नवागत कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी की नजर इन सफेदपोश मनमानियों पर कब पड़ेगी।संजय गांधी अस्पताल में दूर-दराज के जिलों से गरीब मरीज इस उम्मीद में आते हैं कि उन्हें बेहतर और नि:शुल्क इलाज मिलेगा। लेकिन विडंबना यह है कि अस्पताल के ओपीडी और वार्डों से डॉक्टर गायब मिलते हैं, जबकि उनके निजी निवास और डॉक्टर कॉलोनी के क्लीनिकों के बाहर मरीजों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं।
सरकारी आवास निजी कमाई का अड्डा
नियमों के मुताबिक सरकारी आवासों का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए नहीं किया जा सकता, लेकिन रीवा की डॉक्टर कॉलोनी में स्थिति इसके ठीक उलट है। यहां के अधिकांश सरकारी आवास क्लीनिकों में तब्दील हो चुके हैं। डॉक्टरों का पूरा ध्यान सरकारी ओपीडी के बजाय अपने निजी क्लीनिकों पर रहता है। मरीजों को अस्पताल के भीतर से ही बेहतर इलाज के नाम पर बाहर के क्लीनिकों में बुला लिया जाता है।
पूर्व कलेक्टर इलैयाराजा टी का वो खौफनाक दौरा
रीवा के लोग आज भी पूर्व कलेक्टर इलैयाराजा टी के कार्यकाल को याद करते हैं। उन्होंने डॉक्टर कॉलोनी में अचानक छापामार कार्रवाई कर न केवल डॉक्टरों के बीच हड़कंप मचा दिया था, बल्कि कईयों को नोटिस थमाकर व्यवस्था सुधारने पर मजबूर कर दिया था।उस समय डॉक्टरों में प्रशासन का भय था और वे समय पर अस्पताल पहुंचने लगे थे।
कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी से जनता की अपेक्षाएं
वर्तमान कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी अपनी कार्यकुशलता और त्वरित निर्णयों के लिए जाने जाते हैं।रीवा की जनता अब उनसे भी इसी तरह के कड़े कदम उठाने की मांग कर रही है।लोगों का कहना है कि जब तक प्रशासन का डंडा नहीं चलेगा, तब तक संजय गांधी अस्पताल की स्थिति में सुधार होना संभव नहीं है।अब देखना यह है कि क्या कलेक्टर सूर्यवंशी पूर्ववर्ती कलेक्टर की तरह औचक निरीक्षण कर इन डॉक्टरों की मनमानी पर लगाम कसेंगे या मरीजों को इसी तरह निजी क्लीनिकों के चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ेगा।





