🕒 Updated: 24 Mar 2026, 09:16 AM
Mauganj MP:क्या पुलिस जांच में फॉरेस्ट ऑफिसर नयन तिवारी आएंगे सवालों के घेरे में?जांच की आंच क्या पहुंचेगी या फिर बच जाएंगे बड़े अफसर?
मऊगंज.मऊगंज में सामने आए 19 लाख के सागौन कांड ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला जितना बड़ा है, उतनी ही गहरी खामोशी बड़े अफसरों की दिखाई दे रही है। आखिर क्यों जिम्मेदार अधिकारी अब तक खुलकर सामने नहीं आ रहे?
चेकपोस्ट पर खड़ी रही गाड़ी, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं?
सूत्रों के अनुसार सागौन से लदी गाड़ी लंबे समय तक चेकपोस्ट पर खड़ी रही, सूत्रों के अनुसार उक्त गाडी का ड्राइवर और फारेस्ट रेंजर नयन तिवारी से बराबर फोन पर बातचीत हो रही थी लेकिन पुलिस की जांच में समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सवाल उठता है कि क्या यह लापरवाही थी या फिर किसी दबाव में जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा हैं?
पूरे मामले में फॉरेस्ट ऑफिसर नयन तिवारी की भूमिका को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार फारेस्ट आफीसर के संरक्षण में अवैध लकड़ी का कारोबार लंबे समय से फल-फूल रहा था। यदि ऐसा है तो यह केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है, लेकिन अब तक केवल छोटे स्तर के लोगों तक ही कार्रवाई सीमित दिखाई दे रही है। जिन बड़े नामों की चर्चा हो रही है, वे अब भी जांच के दायरे से दूर क्यों हैं?
कॉल डिटेल से खुल सकते हैं कई राज
सूत्रों का दावा है कि यदि मोहम्मद शाहिद और मोहम्मद राशिद के मोबाइल की कॉल डिटेल (17 से 19 तारीख तक) निकाली जाए, तो कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। यह जांच पूरे नेटवर्क को उजागर कर सकती है।
ट्रकों की आवाजाही और संदिग्ध नेटवर्क!
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अवैध सागौन के कई ट्रक पहले भी इस रूट से गुजर चुके हैं। राशिद खान, चंदन जैसवाल और अन्य लोगों की भूमिका की गहन जांच से एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकता है।
मऊगंज में ही क्यों उतारी जा रही थी लकड़ी?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि कलकत्ता से बरेली जा रही लकड़ी आखिर मऊगंज में ही क्यों खाली की जा रही थी? क्या यह कोई तयशुदा ठिकाना था? और अगर हां, तो इसके पीछे किसका संरक्षण था?
फॉरेस्ट विभाग के अन्य अधिकारियों पर भी उठे सवाल?
केवल नयन तिवारी ही नहीं, बल्कि मऊगंज फॉरेस्ट विभाग के अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी जांच जरूरी है। क्या यह पूरा मामला एक संगठित गठजोड़ का हिस्सा है
अगर जिला प्रशासन इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराए, तो खनन माफिया और वन विभाग के बीच संभावित गठजोड़ का बड़ा खुलासा हो सकता है। जिले में जंगलों के लगातार साफ होने की घटनाएं इस ओर इशारा करती हैं।





