JBP MP:हाईकोर्ट ने सोम डिस्टलरीज की याचिका कर दी खारिज!
जबलपुर. शराब का व्यापार मौलिक अधिकार नहीं, नियम तोड़ने पर लाइसेंस रद्द करना सही सोम डिस्टलरीज के लाइसेंस निलंबन मामले में हाईकोर्ट ने सोमवार को सुरक्षित रखा फैसला मंगलवार को सुनाया। जस्टिस विवेक अग्रवाल की सिंगल बेंच ने कहा, शराब का व्यापार मौलिक अधिकार नहीं है। नियमों के उल्लंघन पर लाइसेंस निलंबित या निरस्त करना वैधानिक है। कोर्ट ने आबकारी कमिश्नर की कार्रवाई को सही ठहराया। कहा, जब नियमों का उल्लंघन गंभीर और डिस्टिलिंग, बूइंग, बॉटलिंग आदि गतिविधियों से संबंधित हो तो इस पर व्यापक कार्रवाई करना उचित है। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
यह है मामलाः सोम डिस्टलरीज प्रालि. व सोम डिस्लरीज एंड ब्रेवरीज प्रालि. ने याचिका दायर में कहा था, उनके 8 लाइसेंस आबकारी विभाग ने 4 फरवरी 2026 को सस्पेंड कर दिए। कार्रवाई 26 फरवरी 2024 को जारी नोटिस के आधार पर की। इसमें फर्जी परमिट पर शराब परिवहन का आरोप था।
कंपनी का तर्क.. कंपनियों ने तर्क दिया, 2023-24 के नोटिस पर कार्रवाई की गई। जबकि लाइसेंस 31मार्च 2024 को समाप्त हुए। 2024-25 व 2025-26 में नए लाइसेंस मिले। पुराने नोटिस के आधार पर नए लाइसेंस सस्पेंड करना सही नहीं। संबंधित मामलों में कोर्ट ने सजा पर रोक लगा दी थी। इससे नोटिस का आधार खत्म हो गया था।
सरकार का तर्क.. राज्य सरकार की ओर से कहा गया, आबकारी अधिनियम के तहत लाइसेंसधारी को नियमों का पालन करना अनिवार्य है। धोखाधड़ी या नियम उल्लंघन पाया जाता है तो सख्त कार्रवाई करना कानूनन सही है।





