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Rewa कृषि विभाग में अंधेर गर्दी- मातहत को बचाने संयुक्त संचालक ने की उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना,,

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🕒 Updated: 16 Jul 2026, 09:43 AM

Rewa कृषि विभाग में अंधेर गर्दी- मातहत को बचाने संयुक्त संचालक ने की उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना,,

रीवा जिले के कृषि विभाग का भगवान ही मालिक है क्योंकि यहां के अधिकारी , एक अधिकारी जैसे न रह कर बाबू और लिपिक के अधीनस्थ रह कर काम करते नजर आते हैं। कर्मचारी राजनीति करते हैं और अधिकारी उनकी तेल मालिश में लगे रहते हैं।

बताया जाता है कि विगत दिनों से कार्यालय में सहायक ग्रेड 2 पर अजगर की तरह वर्षों से कुंडली मार कर बैठे राम नारायण श्रीवास्तव का मामला भी कुछ ऐसा ही है । हाल ही में 16 जून को जारी ट्रांसफर आदेश के विरुद्ध उच्च न्यायालय जबलपुर में याचिका लगाने वाले श्रीवास्तव को न्यायालय की तरफ से कोई राहत नहीं मिली परंतु बीते शुक्रवार उन्होंने न्यायालय के आदेश को धता बताते हुए रीवा कृषि कार्यालय में आमद दर्ज करा दी।

मजे की बात ये है कि उनके वरिष्ठ कार्यालय प्रमुख अधिकारी यू पी बागरी द्वारा उनके तथ्यों की बिना जांच पड़ताल किए श्रीवास्तव के अधीनस्थ कर्मचारी जैसा आचरण पेश करते ज्वाइनिंग भी दे दी गई। जबकि माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा उन्हें रिलीविंग के बाद कोई स्टे नहीं दिया गया था वावजूद इसके संयुक्त संचालक कृषि, श्री यूपी बागरी द्वारा उक्त कर्मचारी को संरक्षण दिए जाने का प्रयास किया जा रहा है।

सूत्र बताते हैं कि राम नारायण श्रीवास्तव की तीन बच्चों, पांच वेतन वृद्धियों एवं गलत वरिष्ठता के संबंध में कमिश्नर, रीवा संभाग द्वारा जांच के आदेश दिए गए थे। उक्त जांच का प्रतिवेदन संयुक्त संचालक कोष एवं लेखा श्री टोकाराम टकाम द्वारा 2 महीने से उपर समय हो जाने पर भी किस कारण से दबाया जा रहा है, यह समझ से परे है परंतु इतना जरुर समझ में आ रहा है की प्रदेश के मुख्यमंत्री, रीवा के नवागत कमिश्नर और कलेक्टर द्वारा रीवा में भ्रष्टाचार और कार्य पारदर्शिता के प्रति “जीरो टॉलरेन्स पॉलिसी” के विरुद्ध लड़ाई में सालों से पदस्थ यह संदेहास्पद अधिकारीगण कैसे पतीला लगा रहे हैं।

हद तो तब हो गई 16 जून ट्रांसफ़र ऑर्डर आते ही राम नारायण श्रीवास्तव ने किसी डाक्टर से फ़र्जी जॉन्डिस का मेडिकल सर्टिफिकेट बना कर 15 दिन का चिकित्सकीय अवकाश ले लिया। 30 जून को उन्हें मऊगंज के लिए रीलीव भी कर दिया गया परंतु ट्रांसफ़र के डर से बीमार श्रीवास्तव जी आश्चर्यजनक रूप से 8 जुलाई को कलेक्टर कार्यालय जिला रीवा में आयोजित संघ की बैठक में उपस्थित पाए गए और उन्होंने अपनी प्रतिक्रियाएं भी दीं।

उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि एक ओर मेडिकल अवकाश का आवेदन देकर कार्य से अनुपस्थिति दर्शाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर शासकीय बैठकों में भाग लिया जा रहा है। यह शासकीय नियमों एवं अनुशासन का स्पष्ट उल्लंघन है।

आरोप है कि संबंधित कर्मचारी लगातार पांच वर्षों से कर्मचारी संघ के जिला संयोजक, जिला सचिव एवं अध्यक्ष पद पर रहकर विभिन्न शासकीय सेवकों के हितों को प्रभावित कर रहे थे। इसी कारण संभाग की डीपीसी पिछले दो वर्षों से लंबित थी, जिसका निराकरण इनके संभागीय कार्यालय से हटते ही संपन्न हो गया।

इस पूरे मामले में जिला प्रशासन को संज्ञान लेकर जांच पूर्ण होने तक एवं न्यायालय के आदेश के अनुसार नियमानुसार कार्यवाही करनी चाहिए जिससे कि विभाग के अंदर नियम विरुद्ध पक रही खिचड़ी की हांडी फूट सके और दागदार चेहरे सामने आएं।

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