🕒 Updated: 25 Jul 2026, 07:50 AM
Rewa MP:डीईओ कार्यालय में फर्जी अनुकंपा नियुक्ति प्रकरण के आरोपी रहे कर्मचारी की नई भूमिका पर फिर उठे सवाल!
निलंबन, एफआईआर, जमानत और पदोन्नति निरस्त होने के बाद अब कार्यमुक्ति के बावजूद नई पदस्थापना पर नहीं पहुंचे; वेतन भुगतान को लेकर चर्चाएं तेज
रीवा। जिला शिक्षा विभाग से जुड़े बहुचर्चित फर्जी अनुकंपा नियुक्ति प्रकरण का नाम एक बार फिर सुर्खियों में है। रमा प्रपन्नधर द्विवेदी, जो तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी सुदामा लाल गुप्ता के कार्यकाल में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय रीवा में अटैच होकर अनुकंपा नियुक्ति शाखा के प्रभारी रहे थे, एक बार फिर विभागीय हलकों में चर्चा का विषय बने हुए हैं।
बताया जाता है कि उनके कार्यकाल के दौरान अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े छह कथित फर्जी नियुक्ति मामलों का खुलासा हुआ था। इसके बाद तत्कालीन कलेक्टर ने उन्हें निलंबित किया था तथा थाना सिविल लाइन, रीवा में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। बाद में उन्होंने न्यायालय का रुख किया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हाईकोर्ट से उन्हें राहत नहीं मिली, जबकि बाद में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के लगभग तीन माह बाद उनकी सेवा में बहाली हुई और उन्हें बीईओ कार्यालय , रीवा में अन्वेषक के पद पर पदस्थ किया गया।
इसके बाद एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया, जब हाईकोर्ट के आदेश के बाद उनकी अनुदेशक पद पर पदोन्नति निरस्त हो गई। इसके पश्चात उन्हें उनके मूल पद लेखापाल पर मानते हुए शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बालक गोविंदगढ़ में पदस्थ किए जाने का आदेश जारी किया गया।
जानकारी के अनुसार, संबंधित बीईओ कार्यालय ने 21 जुलाई को विभागीय आदेश के पालन में उन्हें कार्यमुक्त भी कर दिया, लेकिन उन्होंने न तो कार्यमुक्ति आदेश प्राप्त किया और न ही अब तक नवीन पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण किया है।
सबसे बड़ा सवाल—बिना जॉइनिंग के कैसे निकलेगा वेतन?
अब शिक्षा विभाग में सबसे बड़ी चर्चा इस बात को लेकर है कि यदि कर्मचारी कार्यमुक्त हो चुका है और नई पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया है, तो उसका वेतन किस आधार पर आहरित होगा? क्या उसे अनधिकृत अनुपस्थित माना जाएगा, या विभाग कोई अन्य प्रशासनिक निर्णय लेगा?
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्णय पर टिकी निगाहें।




