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Mauganj MP:पत्रकारों को ‘असामाजिक तत्व’ बताने वाले प्रेस नोट पर बैकफुट पर मऊगंज पुलिस, कलेक्टर से मुलाकात के बाद बदली प्रेस नोट की भाषा, पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल!

By: संवाददाता । विराट वसुंधरा

On: Tuesday, September 29, 2026 1:40 AM

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🕒 Updated: 29 Sep 2026, 01:40 AM

Mauganj MP:पत्रकारों को ‘असामाजिक तत्व’ बताने वाले प्रेस नोट पर बैकफुट पर मऊगंज पुलिस, कलेक्टर से मुलाकात के बाद बदली प्रेस नोट की भाषा, पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल!

 

 

मऊगंज। पत्रकारों को कथित तौर पर ‘असामाजिक तत्व’ बताए जाने वाले मऊगंज पुलिस के प्रेस नोट को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। प्रेस क्लब के पत्रकारों द्वारा जिला कलेक्टर श्री जैन से मुलाकात कर आपत्ति दर्ज कराने के बाद पुलिस द्वारा संबंधित प्रेस नोट को संशोधित किए जाने की बात सामने आई है। इस घटनाक्रम ने पुलिस की कार्यशैली और प्रेस नोट तैयार करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

 

बताया गया कि प्रेस क्लब के पत्रकारों ने कलेक्टोरेट पहुंचकर कलेक्टर श्री जैन से मुलाकात की। पत्रकारों ने आरोप लगाया कि मऊगंज थाना प्रभारी राम सिंह पटेल की ओर से जारी प्रेस नोट में पत्रकारों द्वारा प्रकाशित खबरों को लेकर आपत्ति जताते हुए उन्हें शासकीय कार्य में बाधा डालने से जोड़ने का प्रयास किया गया। आरोप है कि प्रेस नोट में पत्रकारों के लिए ‘असामाजिक तत्व’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया और कार्रवाई की चेतावनी दी गई।

 

 

पत्रकारों के मुताबिक, ये खबरें सुखवंत मिश्रा से जुड़े कथित दुष्कर्म प्रकरण और पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों तथा उपलब्ध तथ्यों के आधार पर प्रकाशित की गई थीं। पत्रकारों ने पुलिस के रवैये को आपत्तिजनक बताते हुए कहा कि किसी खबर पर आपत्ति होने की स्थिति में तथ्यात्मक खंडन या कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है, लेकिन पत्रकारों को ही असामाजिक तत्व के रूप में संबोधित करना गंभीर विषय है।

 

 

कलेक्टर से की जांच और कार्रवाई की मांग

प्रेस क्लब के पत्रकारों ने कलेक्टर के समक्ष पूरे मामले की जानकारी देते हुए संबंधित प्रेस नोट की भाषा, पत्रकारों को दी गई कथित चेतावनी और पुलिस की कार्यशैली की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। पत्रकारों ने इसे पत्रकारिता की स्वतंत्रता और पुलिस-मीडिया संबंधों से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग भी रखी।

 

 

विवाद के बाद संशोधित प्रेस नोट

मामले में सबसे अहम बात यह सामने आई है कि विवादित प्रेस नोट के बाद पुलिस द्वारा प्रेस नोट को संशोधित किया गया। अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि शुरुआती प्रेस नोट में इस्तेमाल की गई भाषा उचित थी, तो उसे संशोधित करने की आवश्यकता क्यों पड़ी? और यदि भाषा अनुचित थी, तो उसे जारी करने की जिम्मेदारी किसकी थी?
हालांकि, संशोधित प्रेस नोट जारी करने के पीछे पुलिस की ओर से क्या कारण बताया गया है, यह अभी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में पुलिस का आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना महत्वपूर्ण होगा।

 

 

पत्रकारों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए और यदि किसी स्तर पर नियमों या निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
इस मामले में पुलिस और जिला प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

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