🕒 Updated: 29 Sep 2026, 05:04 PM
Mauganj MP:तथ्यात्मक रूप से विवादित प्रेस नोट के बाद पत्रकारों ने उठाया सम्मान और जवाबदेही का मुद्दा,भाजपा जिलाध्यक्ष को सौंपा ज्ञापन!
मऊगंज। मऊगंज थाना पुलिस की ओर से जारी प्रेस नोट की शब्दावली को लेकर उपजा विवाद अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर तक पहुंच गया है। पत्रकारों के संबंध में कथित रूप से आपत्तिजनक एवं विवादित शब्दों के इस्तेमाल को लेकर मऊगंज प्रेस क्लब के प्रतिनिधिमंडल ने भाजपा जिला अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र मिश्रा से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा।
जानकारी के मुताबिक, थाना प्रभारी राम सिंह पटेल की ओर से 27 सितंबर 2026 को जारी प्रेस नोट में पत्रकारों और मीडिया के संदर्भ में “असामाजिक तत्व”, “कतिपय मीडिया”, “कथित” और “अमान्य पत्रकार” जैसे शब्दों के इस्तेमाल को लेकर पत्रकारों ने आपत्ति जताई। पत्रकारों का कहना है कि किसी व्यक्तिगत प्रकरण के संदर्भ में जारी पुलिस विज्ञप्ति में पूरे पत्रकार समुदाय को इस प्रकार संबोधित करना गंभीर और आपत्तिजनक है।
मामला सामने आने के बाद विवाद बढ़ा और पुलिस की ओर से प्रेस नोट में संशोधन किया गया। पत्रकारों का कहना है कि संशोधित प्रेस नोट जारी किया जाना स्वयं इस बात का संकेत है कि पूर्व प्रेस नोट की भाषा पर पुनर्विचार की आवश्यकता महसूस हुई। हालांकि, पत्रकारों ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष समीक्षा और जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग उठाई है।
भाजपा जिलाध्यक्ष ने पत्रकारों से की मुलाकात
प्रेस नोट विवाद की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आने के बाद भाजपा मऊगंज जिलाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र मिश्रा ने पत्रकारों से संपर्क किया और प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के लिए समय लिया। इसके बाद राजमहल रेस्टोरेंट में उन्होंने मऊगंज प्रेस क्लब के सदस्यों से चर्चा की।
बैठक के दौरान पत्रकारों ने उन्हें पूरे मामले से अवगत कराते हुए ज्ञापन सौंपा। पत्रकारों ने कहा कि पुलिस और मीडिया के बीच स्वस्थ संवाद लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है और समाचार संकलन के दौरान पत्रकारों के सम्मान तथा स्वतंत्र कार्यप्रणाली को लेकर स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।डॉ. राजेंद्र मिश्रा ने पत्रकारों की बात सुनते हुए ज्ञापन स्वीकार किया और कहा कि वे पत्रकारों की समस्या को पार्टी के प्रदेश नेतृत्व तथा मुख्यमंत्री तक पहुंचाएंगे। उन्होंने पत्रकारों के सम्मान और उनके साथ उचित व्यवहार की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
अब सवाल सिर्फ प्रेस नोट का नहीं, जवाबदेही का भी
मामले में पत्रकारों की मुख्य मांग यह है कि विवादित प्रेस नोट की भाषा किन परिस्थितियों में तैयार हुई, उसमें सामूहिक रूप से पत्रकारों के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल क्यों किया गया और बाद में उसे संशोधित करने की आवश्यकता क्यों पड़ी—इन सभी बिंदुओं को स्पष्ट किया जाए।
पत्रकारों का कहना है कि किसी व्यक्ति विशेष या प्रकरण से जुड़े विवाद को पूरे मीडिया समुदाय के संदर्भ में प्रस्तुत करना उचित नहीं माना जा सकता। इसलिए वे चाहते हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा हो और भविष्य में सरकारी प्रेस नोट जारी करने की प्रक्रिया में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।





