Rewa MP: गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों सबूतों के बाद भी चट्टान की तरह DPM की कुर्सी पर बैठे हैं राघवेन्द्र मिश्रा
विराट वसुंधरा
रीवा। भ्रष्टाचार की मजबूत जड़ों का नमूना रीवा जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था में देखा जा सकता है जहां राघवेन्द्र मिश्रा प्रभारी DPM पद पर चट्टान की तरह टिके हुए हैं सैकड़ो शिकायतें दर्जनों जांच महज़ विभागीय खानापूर्ति तक सीमित रहकर फाइलें दम तोड़ चुकी हैं और अब तक विभाग यह निर्णय नहीं ले पाया कि संबंधित अधिकारी पर कार्यवाही कर सके हालांकि कई सीएमएचओ अपने जांच प्रतिवेदन में भ्रष्टाचार करने और जिले से बाहर ट्रांसफर करने का अभिमत दे चुके हैं बावजूद इसके प्रभारी डीपीएम राघवेंद्र मिश्रा को टस से मस नहीं कर सके। सूत्र बताते हैं कि इसके पीछे का कारण राजनीतिक संरक्षण नहीं बल्कि एनएचएम में नीचे से लेकर ऊपर तक भ्रष्टाचार में निजी लाभ प्राप्त करने वाले अधिकारियों का योगदान है।
बताया जाता है कि स्वास्थ्य विभाग की पुरानी नस्तियों से सामने आए दस्तावेजों ने जिला कार्यक्रम प्रबंधक (DPM) राघुवेंद्र मिश्रा के एक दशक पुराने प्रशासनिक प्रकरण को फिर चर्चा में ला दिया है। पुराने अभिलेखों के अनुसार वर्ष 2016 की एक जिला-स्तरीय जांच में 6,36,493 रुपए की शासकीय राशि की क्षति/गबन का मामला फिर सुर्खियों में है हालांकि इस निष्कर्ष की अंतिम प्रशासनिक स्थिति क्या रही और इसके बाद क्या कार्रवाई हुई, यह मूल जांच नस्ती और सक्षम आदेशों से ही स्पष्ट होगा कि वास्तविक स्थिति क्या है।
सूत्र बताते हैं कि कि 2016 की जांच में दोष निर्धारित किया गया था, तो उसके बाद वसूली, विभागीय कार्रवाई अथवा अनुशासनात्मक प्रक्रिया का क्या हुआ? क्या जांच प्रतिवेदन पर कोई अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ? सवाल यह उठता है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो फाइल किस स्तर पर लंबित रही? 2022 में CMHO ने मांगा था रीवा से बाहर तबादला
मामले में दूसरा महत्वपूर्ण दस्तावेज 30 मार्च 2022 का तत्कालीन CMHO रीवा का पत्र है। इसमें मिशन संचालक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, भोपाल को राघवेंद्र मिश्रा को रीवा जिले से बाहर स्थानांतरित करने का अनुरोध किया गया था। पत्र में कार्यों के समुचित निर्वहन में कमी, विभागीय कार्यों की समीक्षा में अपेक्षित रुचि नहीं लेने, पोर्टल पर आवश्यक जानकारी दर्ज नहीं करने, कार्यालय में समय पर उपस्थित नहीं होने, आशा प्रशिक्षण की समीक्षा, ATP व टूर डायरी समय पर प्रस्तुत नहीं करने तथा स्वास्थ्य केंद्रों का भ्रमण नहीं करने जैसी प्रशासनिक आपत्तियों का उल्लेख किया गया था। यह पत्र तत्कालीन अधिकारी की प्रशासनिक आपत्तियों को दर्शाता है, जिन्हें अंतिम तथ्यात्मक निष्कर्ष मानने से पहले संबंधित अभिलेखों और सक्षम जांच से सत्यापित किया जाना आवश्यक है।
तबादला मांग के बाद क्या हुआ?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि CMHO की औपचारिक मांग के बाद मिशन संचालक स्तर पर क्या निर्णय लिया गया? क्या स्थानांतरण आदेश जारी हुआ? यदि नहीं, तो राघुवेंद्र मिश्रा को रीवा में बनाए रखने का आधार क्या था? क्या इसके संबंध में कोई नोटशीट, अनुमोदन या सक्षम आदेश मौजूद है?
संभागायुक्त के निर्देश पर खुलेगी पूरी नस्ती।
शिकायतकर्ता समाजसेवी अशोक मिश्रा ने बताया कि मामला अब संभागायुक्त रीवा के समक्ष पहुंचा है। उनके निर्देश पर क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. जी.एस. परिहार ने चार सदस्यीय जांच दल गठित कर सात दिवस में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। जांच में वर्ष 2016 की जांच नस्ती, ₹6,36,493 से संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड, 2022 का CMHO पत्र तथा उसके बाद के स्थानांतरण, पदस्थापना और दायित्व संबंधी आदेशों को आमने-सामने रखकर देखा जाना महत्वपूर्ण होगा।





