Bhopal MP:NHRC का सख्त रुख: पुलिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत पर DGP को कार्रवाई के निर्देश, दो सप्ताह में मांगी रिपोर्ट!
एडवोकेट देवेंद्र शर्मा की शिकायतों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान, मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय से जुड़ा मामला
भोपाल। मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय भोपाल से जुड़े एक मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के हस्तक्षेप के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है। मप्र उच्च न्यायालय, जबलपुर के एडवोकेट देवेंद्र शर्मा द्वारा पुलिस मुख्यालय के PTRI में AIG पद पर अटैच अभिजीत कुमार रंजन के विरुद्ध की गई शिकायतों पर आयोग ने मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दो सप्ताह के भीतर की गई कार्रवाई का प्रतिवेदन (Action Taken Report) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। NHRC के इस रुख के बाद अब निगाहें मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय की आगामी कार्रवाई पर टिक गई हैं।
शिकायतों पर NHRC ने लिया संज्ञान
जानकारी के अनुसार, अधिवक्ता देवेंद्र शर्मा ने अभिजीत कुमार रंजन के विरुद्ध विभिन्न बिंदुओं को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की थी। शिकायत में लगाए गए आरोपों और उसमें उठाए गए मानवाधिकार संबंधी सवालों को लेकर आयोग ने संबंधित प्रकरण पर संज्ञान लेते हुए मध्यप्रदेश के DGP को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए हैं।
हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। ऐसे में पूरे मामले में अंतिम निष्कर्ष संबंधित विभागीय अथवा सक्षम जांच के बाद ही सामने आएगा।
दो सप्ताह में देनी होगी कार्रवाई की रिपोर्ट
NHRC के निर्देश का सबसे अहम पहलू यह है कि आयोग ने मध्यप्रदेश पुलिस के शीर्ष अधिकारी से दो सप्ताह के भीतर Action Taken Report मांगी है। इसका मतलब है कि संबंधित शिकायत पर पुलिस प्रशासन को की गई कार्रवाई, जांच की स्थिति और उठाए गए कदमों की जानकारी आयोग के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस मुख्यालय इस मामले में किस स्तर पर जांच या कार्रवाई करता है और आयोग को भेजी जाने वाली रिपोर्ट में किन तथ्यों को शामिल किया जाता है।
पुलिस मुख्यालय से जुड़ा मामला, इसलिए बढ़ी गंभीरता
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि शिकायत में जिस अधिकारी का उल्लेख है, वे पुलिस मुख्यालय के PTRI में AIG पद पर अटैच बताए गए हैं। ऐसे में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की ओर से कार्रवाई के निर्देश सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर भी इस प्रकरण को लेकर जवाबदेही का सवाल उठना स्वाभाविक है।
NHRC द्वारा रिपोर्ट तलब किए जाने के बाद अब संबंधित अधिकारियों के स्तर पर शिकायत में उठाए गए प्रत्येक बिंदु की जांच और उस पर की गई कार्रवाई का रिकॉर्ड तैयार किया जाना होगा।
अब आगे क्या?
NHRC के निर्देश के बाद आगामी दो सप्ताह की समय-सीमा महत्वपूर्ण हो गई है। पुलिस मुख्यालय को आयोग के समक्ष यह स्पष्ट करना होगा कि शिकायत पर क्या कार्रवाई की गई, जांच किस स्तर पर है और शिकायत में उठाए गए मानवाधिकार संबंधी बिंदुओं पर विभाग का क्या रुख है।
यदि मामले में विभागीय जांच या अन्य कार्रवाई शुरू होती है, तो उसके परिणाम भी आगे की स्थिति तय करने में महत्वपूर्ण होंगे।
कानूनी स्थिति स्पष्ट रखना जरूरी
यहां यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि शिकायत में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता के दावे हैं और उन्हें तब तक प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता, जब तक सक्षम जांच या संबंधित प्राधिकारी द्वारा उनकी पुष्टि नहीं हो जाती। NHRC द्वारा कार्रवाई के निर्देश और रिपोर्ट मांगे जाने का अर्थ यह है कि आयोग ने मामले में संबंधित प्राधिकरण से कार्रवाई और तथ्यात्मक स्थिति की जानकारी मांगी है; यह अपने आप में आरोपों की अंतिम पुष्टि नहीं है।
अब पूरे मामले में मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय की कार्रवाई और NHRC को प्रस्तुत की जाने वाली रिपोर्ट पर सभी की नजर रहेगी।





