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MP news:बेटियों की शादी की सरकारी मदद में बड़ा घोटाला! 5,923 शादियों के नाम पर ₹30.18 करोड़ की गड़बड़ी का आरोप!

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🕒 Updated: 31 Oct 2026, 06:24 AM

MP news:बेटियों की शादी की सरकारी मदद में बड़ा घोटाला! 5,923 शादियों के नाम पर ₹30.18 करोड़ की गड़बड़ी का आरोप!

 

 

 

मजदूरों और गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए आई राशि में कथित फर्जीवाड़े से हड़कंप, पूर्व जनपद CEO शोभित त्रिपाठी पर गंभीर आरोप

सिरोंज। मध्यप्रदेश में गरीब और श्रमिक परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए संचालित सरकारी सहायता योजना में कथित बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आने से प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। आरोप है कि सिरोंज क्षेत्र में 5,923 कथित फर्जी विवाहों के नाम पर करीब 30 करोड़ 18 लाख रुपये की राशि का अनियमित तरीके से भुगतान किया गया।

मामले में पूर्व जनपद CEO शोभित त्रिपाठी का नाम भी सामने आया है। उन्हें पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव का साढ़ू बताया जा रहा है। हालांकि, किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी और भूमिका का अंतिम निर्धारण संबंधित जांच एजेंसी अथवा न्यायिक प्रक्रिया में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही होगा।

 

 

 

 

गरीबों की बेटियों के नाम पर सरकारी खजाने को चपत?

विवाह सहायता योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और श्रमिक परिवारों को उनकी बेटियों की शादी में आर्थिक मदद उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि सरकारी रिकॉर्ड में फर्जी विवाह दिखाकर करोड़ों रुपये की राशि निकाले जाने के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं बल्कि जरूरतमंद परिवारों के अधिकारों के साथ गंभीर धोखाधड़ी का विषय बन जाता है।

बताया जा रहा है कि 5,923 विवाह प्रकरणों में करीब ₹30.18 करोड़ की राशि के लेन-देन पर सवाल उठे हैं। पूरे मामले में यह जांच का विषय है कि विवाहों का सत्यापन किस स्तर पर किया गया, पात्रता की जांच किसने की और भुगतान की प्रक्रिया में किन-किन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका रही।

 

 

 

 

30 करोड़ की राशि आखिर गई कहां?

इतनी बड़ी राशि के कथित भुगतान ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि जांच में फर्जी हितग्राहियों अथवा फर्जी विवाहों की पुष्टि होती है तो यह भी सामने आना जरूरी होगा कि—

  • किन लोगों के नाम पर राशि स्वीकृत की गई?
  • विवाहों का भौतिक सत्यापन किसने किया?
  • सरकारी रिकॉर्ड में फर्जी दस्तावेज कैसे दर्ज हुए?
  • भुगतान को किस अधिकारी या कर्मचारी ने मंजूरी दी?
  • लाभार्थियों के बैंक खातों में पैसा गया या किसी अन्य माध्यम से राशि का दुरुपयोग हुआ?
  • कथित घोटाले में अधिकारियों, कर्मचारियों और बिचौलियों की क्या भूमिका थी?
  • क्या इस पूरे मामले में अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी?

 

 

 

 

राजनीतिक रिश्तेदारी ने बढ़ाए सवाल

मामले में पूर्व जनपद CEO शोभित त्रिपाठी का नाम सामने आने और उन्हें पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव का साढ़ू बताए जाने के बाद राजनीतिक सवाल भी उठने लगे हैं। हालांकि, किसी रिश्तेदारी मात्र के आधार पर किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती।

जरूरत इस बात की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच हो तथा यदि सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाए।

 

 

 

 

सरकार से जवाब की मांग

विपक्ष और आम लोगों की ओर से सवाल उठाया जा रहा है कि जब सरकार गरीब कल्याण और श्रमिक परिवारों के हित में योजनाएं चलाने का दावा करती है, तो ऐसी योजनाओं में करोड़ों रुपये की कथित गड़बड़ी कैसे संभव हुई?

₹30.18 करोड़ की राशि से जुड़े इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कथित फर्जीवाड़े के पीछे कौन-कौन लोग थे और सरकारी धन की निगरानी करने वाली व्यवस्था इतनी बड़ी अनियमितता को समय रहते क्यों नहीं रोक सकी?

 

 

 

फिलहाल पूरे मामले में सामने आए आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कितनी राशि का वास्तविक दुरुपयोग हुआ, कौन लोग जिम्मेदार थे और सरकारी खजाने को हुए नुकसान की भरपाई कैसे होगी।

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