Mauganj MP:जल जीवन मिशन पर गंभीर सवाल: अधूरी पाइपलाइन, गायब मोटर और फिर भी हैंडओवर की तैयारी!
हरिजन बस्तियों तक नहीं पहुंची पाइपलाइन, कागजों में योजना पूरी करने की तैयारी का आरोप; ग्रामीणों ने उठाए सवाल
मऊगंज। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना का उद्देश्य हर घर तक नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, लेकिन मऊगंज जिले में योजना के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई ग्राम पंचायतों में जल जीवन मिशन का काम अभी जमीन पर अधूरा है, इसके बावजूद योजना को हैंडओवर करने की तैयारी की जा रही है।
बताया जा रहा है कि कुछ पंचायतों की हरिजन बस्तियों में आज भी पाइपलाइन नहीं पहुंची है, कई परिवारों को नल कनेक्शन नहीं मिले हैं और पानी की नियमित आपूर्ति भी शुरू नहीं हुई है। ऐसे में सवाल यह है कि जब योजना का मूल उद्देश्य ही हर घर तक पानी पहुंचाना है, तो अधूरे काम को हैंडओवर करने की जल्दबाजी क्यों?
टंकी खड़ी, लेकिन मोटर कहां है?
ग्रामीणों की शिकायतों के मुताबिक कुछ स्थानों पर पानी की टंकियां तो दिखाई दे रही हैं, लेकिन उन्हें संचालित करने के लिए आवश्यक मोटर एवं अन्य व्यवस्थाओं को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि टंकी तैयार है लेकिन पानी भरने और सप्लाई की व्यवस्था ही अधूरी है, तो केवल टंकी खड़ी कर देने से जल जीवन मिशन का उद्देश्य कैसे पूरा होगा?
हरिजन बस्तियों में पाइपलाइन नहीं तो किस आधार पर होगा हैंडओवर?
सबसे बड़ा सवाल उन बस्तियों को लेकर उठ रहा है, जहां ग्रामीणों के अनुसार अभी तक पाइपलाइन और नल कनेक्शन का काम पूरा नहीं हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि हैंडओवर से पहले प्रत्येक घर, विशेषकर वंचित और हरिजन बस्तियों में, वास्तविक नल कनेक्शन और पानी की आपूर्ति का भौतिक सत्यापन होना चाहिए। यदि मौके पर पाइपलाइन ही नहीं है, तो कागजी पूर्णता दिखाकर योजना को हैंडओवर करना जनता के साथ अन्याय होगा।
ठेकेदार, पंचायत और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल
अधूरे कार्य के बावजूद हैंडओवर की तैयारी को लेकर ग्रामीणों ने ठेकेदार और पंचायत स्तर के जिम्मेदार लोगों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। कुछ ग्रामीणों द्वारा ठेकेदार, सरपंच और सचिव के बीच कथित मिलीभगत के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए पूरे मामले में निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अधिकारियों के जवाब पर भी सवाल
मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों से स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश किए जाने पर भी ग्रामीणों को संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की बात सामने आ रही है। यही वजह है कि योजना के कार्यों की गुणवत्ता, पूर्णता और हैंडओवर प्रक्रिया को लेकर संदेह और गहरा रहा है।
करोड़ों की योजना, फिर भी प्यासे क्यों ग्रामीण?
जल जीवन मिशन पर सरकार बड़े स्तर पर राशि खर्च कर रही है। ऐसे में सबसे अहम सवाल यही है कि यदि योजना का लाभ अंतिम छोर पर रहने वाले गरीब परिवारों और बस्तियों तक नहीं पहुंच रहा है, तो फिर योजना की सफलता का दावा किस आधार पर किया जा रहा है?
ग्रामीणों की मांग है कि केवल दस्तावेजों और रिपोर्ट के आधार पर योजना को पूर्ण घोषित न किया जाए, बल्कि अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंचकर प्रत्येक पंचायत का भौतिक सत्यापन करे।
ग्रामीणों ने कलेक्टर से की जांच की मांग
स्थानीय लोगों ने मऊगंज कलेक्टर से मांग की है कि जल जीवन मिशन के तहत चल रहे और हैंडओवर किए जाने वाले कार्यों का स्वतंत्र एवं स्थलीय निरीक्षण कराया जाए। खासतौर पर हरिजन एवं अन्य वंचित बस्तियों में पाइपलाइन, नल कनेक्शन, मोटर, पानी की उपलब्धता और नियमित सप्लाई की वास्तविक स्थिति जांची जाए।
अब सवाल सिर्फ पाइपलाइन बिछाने का नहीं, बल्कि यह है कि सरकारी योजना का पानी वास्तव में गरीब के घर तक पहुंचा या फिर फाइलों में ही बह रहा है?





